ईरान ने अपने तटवर्ती पानी में अभियान में भाग लेने वाली पनडुब्बी से अधिक की ज़रूरत महसूस की और फिर ” फातेह” नाम की पनडुब्बी बनी। 593 टन की यह पनडुब्बी गदीर पनडुब्बी से कई आयामों से बहुत आधुनिक है। यह 200 मीटर की गहरायी में भी बड़ी आसानी से चलती है , 250 मीटर गहरायी तक जा सकती और 35 दिन समुद्र के भीतर रह सकती है। इस पनडुब्बी को बनाने के लिए देश के भीतर चार लाख बारह हज़ार कल पुर्ज़े तैयार किये गये जिसके लिए विशेषज्ञों ने 42 लाख घंटे काम किया और इस पनडुब्बी को बनाने में 48 डिज़ाइनिंक कंपनियों, 120 कारखानों, 80 नॉलिज बेस्ट कंपनियों, 57 युनिवर्सिटों और 195 रिसर्च सेन्टरों ने सहयोग किया।

गदीर के बाद कोशिश रुकी नहीं और अधिक आधुनिक और भारी पनडुब्बी निर्माण की कोशिश जारी रही जिसके परिणाम में ” बेसत ” नामक पनडुब्बी की योजना बनी। बेसत 3000 टन भार उठा सकती है जिसका अर्थ यह है कि यह अधिक हथियार अपने साथ लेकर अभियान में भाग ले सकती है। ईरानी इंजीनियरों ने 30 वर्षीय अनुभव के बाद इसका डिज़ाइन तैयार किया है और इसके निर्माण की सारी तैयारी पूरी की जा चुकी है और जैसा कि नौसेना ने बताया है कि इसे जारी वर्ष में निर्माण किया जाएगा। ईरान का अगला और आखिरी क़दम, पनडुब्बी के ईंधन के लिए छोटा परमाणु रिएक्टर बनाना है। वास्तव में एक बहुत ही छोटा सा परमाणु बिजली घर तैयार किया जाता है और उसे पनडुब्बी में लगा दिया जाता है जिससे पनडुब्बी परमाणु ईंधन से चलने लगती है। ईरान इस दिशा में बढ़ रहा है। परमाणु ईंधन से चलने वाली पनडुब्बी की बहुत सी अच्छाई और बुराई है मगर से महत्वपूर्ण बात यह है कि वह अधिक समय तक ईंधन लिए बिना समुद्र तल में अपना काम कर सकती है मतलब 30 साल तक वह बिना ईंधन लिए अपना काम जारी रख सकती है।
ईरान ने यह सारी सफलताएं, अपने खिलाफ कड़े प्रतिबंधों के दौरान हासिल की हैं यही वजह है कि अब जबकि अगले कुछ महीनों में ईरान के खिलाफ हथियारों का प्रतिबंध समाप्त होने वाला है अमरीका बौखलाहट का शिकार है। अमरीका को चिंता है कि हथियारों का प्रतिबंध खत्म होने के बाद ईरान की सेना के पास अत्याधुनिक हथियार और तकनीक आ जाएगी जिससे उसके लिए काफी समस्याएं पैदा हो जाएंगी।

