बार बार शिकायत करना पीड़िता को पड़ा भारी,समस्या अधिकारियों ने लिखाया मुकद्दमा

मुकीम अहमद अंसारी

बदायूं। बार बार शिकायत लेकर गई पीड़िता की समस्या का निदान करने की बजाय,पीड़िता पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और आत्मदाह की धमकी देने का अधिकारियों ने लिखाया मुकद्दमा

यदि आप बदायूं में हैं और अधिकारियों के पास अपनी समस्या या शिकायत लेकर जा रहे हैं तो सावधान हो जाइए आपकी समस्या का निदान हो या न हो लेकिन यहां के अधिकारी आप पर सरकारी कार्य में बाधा डालने का मुकद्दमा ज़रूर लिखवा देंगे।बदायूं में अजीबो गरीब मामला आया सामने आया है, जहां बदायूं जिला समाज कल्याण अधिकारी के पास बार बार फरियाद लेकर जाना एक शिकायत कर्ता लड़की को भारी पड़ गया,बार बार समस्या लेकर आने से बौखलाई जिला समाज कल्याण अधिकारी ने पीड़िता की समस्या का समाधान करने की बजाय लड़की के साथ बदतमीजी करते हुए उसे धक्के मारकर ऑफिस से बाहर निकलवा दिया और उस पीड़िता पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और आत्मदाह की धमकी देने के आरोप में मुकद्दमा लिखा दिया।जिससे जनता में भारी आक्रोश है।
जहां सरकार मिशन शक्ति चलाकर बेटियों/ महिलाओं को जागरूक करने उनकी सुरक्षा करने और उन्हें आगे बढ़ाने के दावे करती है वहीं बदायूं में शिकायत करने आई एक बेटी पर अधिकारियों ने मुकद्दमा लिखवा दिया।मामला जनपद बदायूं के दातागंज थाना क्षेत्र के ग्राम समरेर का है,जहां की रहने वाली 22 वर्षीय इमरती ने समरेर स्थित आश्रम पद्धति आवासीय स्कूल में पढ़ाई की थी,यही से उसे तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी ने स्कूल की ड्रेस सिलने का ठेका दिया, चूंकि इमरती इसी स्कूल में पढ़ी थी इसलिए उसने बिना लिखा पढ़ी में विश्वास कर लिया।इमरती बहुत गरीब है उसके पिता दिल्ली में मजदूरी करते हैं।इमरती की मां भी इसी स्कूल में बतौर वार्डेन काम कर रहीं थी।ड्रेस सिलने के लिए इमरती को कपड़ा भी स्कूल से ही मुहैया कराया गया था।उसने ने रात दिन एक कर 5200 पीस ड्रेस के सिलकर तैयार कर दिए इसके लिए उसने कर्ज़ पर पैसे लेकर कारीगर भी लगाए थे।जब ड्रेस सिलकर तैयार हो गईं तो स्कूल प्रबंधन ने ड्रेस लेने से मना कर दिया।उस समय बदायूं में तैनात रहे समाज कल्याण अधिकारी रामजनम का भी ट्रांसफर हो गया। अब इमरती अधिकारियों के चक्कर लगाती रही।हालांकि जब अधिकारियों ने उसे अनसुना कर दिया तो उसने क्षेत्रीय विधायक राजीव कुमार सिंह से फरियाद की।क्षेत्रीय विधायक के हस्तक्षेप के बाद इमरती से स्कूल प्रबंधन और समाज कल्याण अधिकारी ने ड्रेस के 2200 पीस ले लिए और उसका भुगतान कर दिया।लेकिन अभी भी उसके घर में 3 हज़ार ड्रेस के पीस रखे हुए हैं।इमरती ने इसके बाद अपना हक मांगने के लिए अधिकारियों के फिर से चक्कर लगाने शुरू कर दिए।वह पिछले तीन साल से अपने हक की लड़ाई लड़ रही है,और न्याय के लिए दर दर भटक रही,जिला अधिकारी से लेकर समाज कल्याण अधिकारी और सीडीओ तक लगातार चक्कर लगाती रही,लेकिन समाधान नहीं हुआ। उल्टा उसकी मां को भी विद्यालय से निकाल दिया गया।इमरती ने बताया कि वह समाज कल्याण अधिकारी मीनाक्षी वर्मा के ऑफिस में शिकायत लेकर पहुंची उसे देखते ही समाज कल्याण अधिकारी बौखला गईं और गलियां देने लगीं,चप्पल उतारकर पीटने को दौड़ी और अपशब्द कहे,तथा अपने चपरासी से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया।इसके बाद समाज कल्याण अधिकारी ने इमरती के खिलाफ़ सरकारी कार्य में बाधा डालने और आत्मदाह की धमकी देने के आरोप में बदायूं सिविल लाइन थाने में मुकद्दमा पंजीकृत करा दिया।
लेकिन जहां सरकार बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए स्कूल कॉलेजों से लेकर लगातार धरातल स्तर पर कार्य कर रही है,उस प्रदेश में एक बेटी के साथ ऐसा होगा कि वह न्याय मांगने अधिकारियों के पास जाएगी और अधिकारी उसकी समस्या का निदान करने की बजाय मुकद्दमा लिखवा देंगे तो कया होगा।

*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

Don`t copy text!