बिना पंजीकरण के चल रहे अस्पताल में एक और जच्चा बच्चा की हुई मौत, परिवार में मचा कोहराम परिजनों ने अस्पताल पर पहुंच कर किया हंगामा,

मुकीम अहमद अंसारी

सहसवान, बदायूं। सहसवान तहसील क्षेत्र में बिना पंजीकरण के चल रहे दर्जनों हॉस्पिटल में प्रत्येक माह किसी न किसी जच्चा बच्चा की हो रही मौतो का मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है जो स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सवालिया निशान उठाते हैं ऐसा ही एक मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दहगवां मैं बिना पंजीकरण के चल रहे महेश्वरी हॉस्पिटल में देखने को मिला जहां प्रसव के लिए पहुंची एक प्रसूता की अस्पताल कर्मचारियों की लापरवाही से जन्म के कुछ ही मिनट बाद बच्चे की मौत हो गई । चर्चा है की बच्चे की मौत के बाद प्रसूता की भी हालत बिगड़ गई और उसकी भी थोड़ी देर बाद मौत हो गई जच्चा बच्चा की हुई मौत की जानकारी जैसे ही परिजनों को मिली भारी तादाद में परिजन अस्पताल पर पहुंचकर हंगामा करने लगे जानकारी मिलने पर पहुंची थाना जरीफ नगर पुलिस ने जैसे तैसे हंगामा कर रहे परिजनों को कार्यवाही करने का आश्वासन देकर मामला शांत कराया पुलिस ने मृतक जच्चा बच्चा के शवों को सील करके पोस्टमार्टम हेतु जिला चिकित्सालय भेज दिया है।
जानकारी के मुताबिक ग्राम दादरा निवासी गोवर्धन अपनी 22 वर्षीय पत्नी विमलेश जिसको प्रथम प्रसव हेतु महेश्वरी हॉस्पिटल दहगवां सुबह 7:00 के लगभग लेकर पहुंचे जहां चिकित्सक ने विमलेश को अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती कर लिया कुछ देर बाद विमलेश ने चर्चा है एक नवजात शिशु को जन्म दिया जिसकी कुछ ही देर बाद मृत्यु हो गई नवजात शिशु की हुई मौत के बाद जच्चा विमलेश की भी हालत बिगड़ने लगी हालत बिगड़ी देखकर परिजनों का कहना है की 11:00 बजे की लगभग विमलेश ने भी दम तोड़ दिया।
पुलिस ने हंगामा कर रहे परिजनों को जैसे तैसे करके शांत कराया तथा उन्हें कार्यवाही का पूर्ण आश्वासन दिया इसके बाद पुलिस ने मृतक जच्चा बच्चा के शवो को सील करके पोस्टमार्टम हेतु जिला मुख्यालय भेज दिया।
सहसवान तहसील क्षेत्र में दर्जनों चल रहे फर्जी जच्चा बच्चा केदो पर प्रत्येक माह किसी न किसी जच्चा या बच्चा की मौत का मामला हो रहा है इतने बड़े हादसे के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठाना लाजिम है स्वास्थ्य विभाग ऐसा नहीं की इन झोलाछाप चिकित्सा वालों के विरुद्ध कार्यवाही ना करता हो परंतु उसकी यह कार्यवाही सिर्फ महज औपचारिकता तक ही रह जाती है जब नोडल अधिकारी छापामार अभियान के लिए निकलते हैं उससे पहले ही मामला झोलाछाप चिकित्सालय के स्वामियों को दे दी जाती है जिसके कारण वह पहले से ही अपने-अपने हॉस्पिटल बंद करके या बोर्ड हटाकर ऐसे बैठ जाते हैं जैसे इस अस्पताल में कोई भी स्वास्थ्य सेवा संबंधी सेव नहीं दी जा रही जबकि हकीकत में कुछ और ही होता है अब देखना है की कुंभकरनी नींद सो रहे स्वास्थ्य विभाग की आंखें खुलती हैं या फिर महज औपचारिकता अदा कर झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध टाइम टॉय टॉय फिश कर दिया जाता है।

*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

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