बाराबंकी में”अदबी कैनवस” के नाम से एक बज़्म की तशकील की गई है।
जिसके तहत माहाना नशिस्तें,अदबी महफ़िलें और मुशायरे आयोजित किए जाएंगे।
इसी सिलसिले में रविवार को आदर्श बाराबंकवी की रिहायश गाह पर एक बैठक आयोजित हुई।
जिसमें सर्वसम्मति से बज़्म की कमेटी में निम्न पदाधिकारी चुने गए।
बज़्म के सर परस्त आला डॉक्टर फ़िदा हुसैन बनाए गए हैं। जबकि बज़्म के सर परस्त वक़ार बाराबंकवी और नायब सर परस्त गुलज़ार फ़ातिमा एडवोकेट रहेंगी।
इसी तरह बज़्म के सदर ज़ियाउद्दीन अहमद (माडर्न शूज़) नायब सदर ज़की तारिक़,कैफ़ी रुदौलवी और शमीम अंसारी बने हैं।जनरल सेक्रेटरी डॉक्टर रेहान अलवी तथा सेक्रेटरी आदर्श बाराबंकवी होंगे। वरिष्ठ कवि अशोक कुमार सोनी को कोषाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। सलीम हमदम रुदौलवी को प्रचार प्रसार सेक्रेटरी बनाया गया है।
बैठक में यह भी तय हुआ कि अभी बज़्म की कमेटी में कुछ और ओहदेदार बनाए जाएंगे।
नव तशकील बज़्म के सदर ज़ियाउद्दीन अहमद द्वारा बताया गया कि हर महीने के तीसरे रविवार को दोपहर एक बजे से माहाना तरही नशिस्त का आयोजन हुआ करेगा। तथा हर तीन महीने के बाद एक अज़ीमुश्शान मुशायरा और साल में एक ऑल इंडिया कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया जाएगा।
अदबी कैनवस की महत्वपूर्ण बैठक के बाद सजी शेर-ओ-सुख़न की महफ़िल
बारांबकी। नव तशकील बज़्म अदबी कैनवस की एक महत्वपूर्ण बैठक आदर्श बाराबंकवी के आवास पर आयोजित हुई। बैठक के बाद शेरी नशिस्त का भी आयोजन किया गया।
जिसमें शायरों और कवियों द्वारा पढ़े गए कलाम के कुछ अशआर आपके लिए पेश हैं।
डॉक्टर फ़िदा हुसैन-
हम ने सोचा था कि धोखा है गुज़र जाएगा।
क्या ख़बर थी कि वो सासों में उतर जाएगा।।
ज़की तारिक़ –
इंतक़ाम ज़रबत का इस तरह लिया जाए।
जब भी ज़ख़्म दे कोई मुस्कुरा उठा जाए।।
डॉक्टर रेहान अलवी –
चापलूसों में ही जब बंटने लगे तमग़े मियां।
कैसे होगी महफ़िलों में क़द्र फिर फ़नकार की।।
कैफ़ी रुदौलवी –
इसी उलझन में गुज़र जाती है रातें कितनी।
अब है मन्सूब मेरे नाम से बातें कितनी।।
आदर्श बाराबंकवी –
सिखाऊं किस तरह उसको बेचारा कम समझता है।
मेरा महबूब है नांदा इशारा कम समझता है।।
अशोक कुमार सोनी –
तुम्हारे मौन का मैं अर्थ क्या समझूं।
कि तुम पाषाण से भी बढ़ गए दो चार ढग आगे।।
सलीम हमदम रुदौलवी –
मुआशरे का ये कैसा निज़ाम है यारो।
जिधर भी देखो उधर ख़ाम – ख़ाम है यारो।।
गुलज़ार फ़ातिमा एडवोकेट –
बे सबब मुस्कराना नहीं चाहते।
दिल किसी का दुखाना नहीं चाहते।।
नशिस्त के अख़िर में बज़्म के सेक्रेटरी आदर्श बाराबंकवी ने मिसरा तरह ” फिर किसी ने मुझे सदा दी है ” क़ाफ़िया सदा और रदीफ़ दी है पेश किया,जिसकी सभी ने ताईद की।
बज़्म के सदर ज़ियाउद्दीन अहमद ने बताया कि अगली नशिस्त 15 फ़रवरी बरोज़ इतवार को एक बजे से होगी।
सरपरस्त आला डॉक्टर फ़िदा हुसैन ने सभी शायरों और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया।

