जनप्रतिनिधि की भूमिका निभाने वाले पहले विधायक बने सतीश शर्मा!

नेवाज अंसारी संवाददाता तहसील रामसनेहीघाट

रामसनेहीघाट-बाराबंकी। दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने जाने वाले सतीश चंद्र शर्मा ने अपने तीन साल के कार्यकाल में जिस तरह आम जनमानस के मध्य अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, उसने उन्हें ‘वास्तविक जनप्रतिनिधि’ की भूमिका मे ला खड़ा कर दिया है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में इस क्षेत्र को शायद ऐसा पहला जनप्रतिनिधि मिला है जो जनता के सुख-दुख में सहभागी होकर हर समय क्षेत्र में उपलब्ध रहता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र से दर्जन भर प्रत्याशियों की प्रत्याशिता के बीच प्रवेश भाजपा द्वारा श्री शर्मा को दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र का प्रत्याशी घोषित किया गया। शुरुआती दौर में जिस तरह से संभावित प्रत्याशियों की आपसी रस्साकसी चली उससे लगा की शायद श्री शर्मा को मुंहकी खानी पड़े लेकिन ज्यों-ज्यों चुनाव का कारवां बढा त्यों-त्यों शर्मा के पीछे मतदाताओं एवं समर्थकों की लाइन भी लंबी होती चली गई। सारे कयासों को धता बताते हुए श्री शर्मा ने सपा एवं कांग्रेस के संयुक्त प्रत्यासी पूर्व मंत्री राजीव कुमार सिंह को भारी मतो के अंतर से पराजित कर क्षेत्र में केसरिया झंडा फहरा दिया।

प्रदेश भाजपा द्वारा श्री शर्मा की प्रत्याशिता को महत्व देने के पीछे उनकी पारिवारिक विरासत का बहुत बड़ा योगदान रहा। श्री शर्मा का परिवार शुरु से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा से जुड़ा रहा है, श्री शर्मा के बाबा डॉ अवधेश शर्मा जिले के जाने पहचाने एवं निष्ठावान पार्टी कार्यकर्ताओं की सूची में गिने जाते थे। 1985 के दौर में श्री अवधेश शर्मा भारतीय जनता पार्टी बाराबंकी के जिलाध्यक्ष रहे, डॉ शर्मा की पार्टी के प्रति निष्ठा, योग्यता एवं मिलनसार व्यवहार हमेशा उन्हें पार्टी में अग्रिम पंक्ति में खड़ा करता रहा। जब तक वह रहे पार्टी को विस्तार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी 1989 में पहली बार भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर 70 सांसदों के साथ वर्चस्व में आई,1991 के चुनाव में पहली बार भाजपा को पूर्ण बहुमत के साथ प्रदेश में सरकार बनाने का मौका मिला। उस समय डॉ शर्मा जिले के अध्यक्ष हुआ करते थे। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि आज भी सतीश शर्मा की पहचान डॉ अवधेश शर्मा से ही पूरी तरह से जुड़ी हुई है। महत्वपूर्ण तथ्य तो यह है कि विधायक श्री शर्मा ने अपने बाबा के पद चिन्हों पर चलते हुए पार्टी को मजबूत करने में न केवल अहम भूमिका निभाई बल्कि शायद वे पहले ऐसे विधायक हैं जिन्होंने दरियाबाद क्षेत्र का अभूतपूर्व विकास किया है। जितना विकास एक विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र का किया है उतना मंत्री रहते हुए भी अन्य जनप्रतिनिधि नहीं कर पाए।

दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि 3 साल के कार्यकाल में श्री शर्मा पूरी तरह से जनता के बीच जुड़े रहे, लोगों के दुख-सुख में सहभागी बने, ऐसा शायद कोई दिन रहा हो जब श्री शर्मा क्षेत्र में मौजूद न रहे हों! इससे पूर्व तक यह क्षेत्र सिद्धोर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता था जिसमे दर्जनों विधायक आए, दरियाबाद से भी दर्जनों विधायक चुने गए लेकिन जनता को कभी-कभार विधायको के दर्शन हुआ करते थे, लेकिन श्री शर्मा ने उस परंपरा को खत्म करते हुए जनता के वास्तविक वास्तविक प्रतिनिधि की भूमिका का ईमानदारी से निर्वहन किया है। उनकी इस खासियत की चर्चा उनके आंतरिक विरोधियों को छोड़कर आम जनता के बीच कभी भी सुनी जा सकती है।

कोरोना जैसी बीमारी के दौरान भी विधायक श्री शर्मा घर पर नहीं बैठे बल्कि क्षेत्र में घूम घूम कर गरीबों मजदूरों व असहाय लोगों को भोजन उपलबद्ध कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। अन्य दलों के नेता कार्यकर्ता व जनप्रतिनिधि घरों में बैठे लाकडाउन का पालन कर रहे हैं,वही विधायक श्री शर्मा अपनी चिंता छोड़कर लोगों की चिंता करते हुए क्षेत्र में सक्रिय हैं। अधिकारियों से बातचीत कर कदम कदम पर उन्हे सहयोग देते हुए पात्र लोगों तक खाद्यान्न पहुंचाने के लिए खुद मोर्चा संभाले हुए श्री शर्मा तहसील प्रशासन को भी सहयोग दे रहे हैं। मौजूदा दौर में उन्होंने बाहर से आए मजदूरों की सुविधा के लिए उनका स्वास्थय परीक्षण, भोजन पानी की व्यवस्था में पूरी तरह जुटे हैं।
कुलमिलाकर देखा जाए तो दरियाबाद क्षेत्र के युवा व तेज़ तर्रार विधायक श्री शर्मा अपने पहले कार्यकाल में ही आम जनता के बीच इतना पॉपुलर हो चुके है कि आने वाले भविष्य में उनके समानांतर खड़ा हो पाना अन्य किसी के लिए काफी मुश्किल साबित होगा।

Don`t copy text!