बाराबंकी।जिले की सियासत में एक बार फिर दलबदल की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष हाफिज़ भारती ने सपा का दामन छोड़कर बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस फैसले के साथ ही बाराबंकी की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।
गौरतलब है कि हाफिज़ भारती का राजनीतिक सफर पहले भी दल-बदल से जुड़ा रहा है। वे पहले बसपा में थे, वहां से सपा में आए और अब एक बार फिर अपने राजनीतिक वजूद की तलाश में बसपा में लौट गए हैं। उनके इस कदम को राजनीतिक मजबूरियों और भविष्य की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस दलबदल को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोगों का कहना है कि हाफिज़ भारती के सपा छोड़ने से पार्टी पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। आरोप है कि वे मुख्यालय तक सीमित रहकर ही राजनीति करते रहे हैं और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता बेहद सीमित रही है। आम मतदाताओं में उनका कोई मजबूत जनाधार नहीं माना जाता।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो हाफिज़ भारती की पहचान दलों के मूल वोट बैंक के सहारे बनी रही है, न कि जनसंपर्क या जमीनी संघर्ष के दम पर। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि बसपा में वापसी से उन्हें कितनी राजनीतिक कामयाबी मिलेगी।
फिलहाल हाफिज़ भारती के इस कदम से बसपा खेमा उत्साहित दिख रहा है, जबकि सपा ने इसे मामूली राजनीतिक घटना करार दिया है। अब यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि यह दलबदल हाफिज़ भारती के लिए नई सियासी राह खोलेगा या फिर यह कदम भी उनकी राजनीतिक अस्थिरता की कहानी बनकर रह जाएगा।
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