प्रशासन की लापरवाही के चलते क्षेत्र मे फर्जी यू-ट्यूब पत्रकारों की बाढ़
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी
बाराबंकी । शासन प्रशासन की लापरवाही के चलते क्षेत्र मे फर्जी यू-ट्यूब पत्रकारों की बाढ़ आई हुई है। इन यू-ट्यूब पत्रकारों के पास किसी भी तरह के दैनिक या साप्ताहिक अखबार का आरएनआई नहीं है और न ही ये फर्जी पत्रकार जिले की मुख्यधारा की पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वह इलैक्ट्रोनिक मीडिया को भी शर्मशार कर रहे है। किसी भी परिस्थिति को वीडियो या फोटो से जोड़कर गलत तरीके से खबरों को चलाने धमकाने और उगाही में बढ़-चढ़कर इस तरह के स्वयंभू पत्रकार यूट्यूब फेसबुक व्हाट्सएप ग्रुप का भी भारी मात्रा में दुरुपयोग कर रहे हैं।
बताते चले कि इन दिनों सफदरगंज थाना क्षेत्र में यूट्यूब चैनल पर चलाने वाले पत्रकारों की भरमार कुछ ज्यादा ही हो गई है जिला जनसंपर्क विभाग में भले ही हो लेकिन इन तथाकथित पत्रकार एक संगठित गिरोह बनाकर रातों में भी घुमते देखें जा सकते हैं सूत्र बताते हैं कि अभी हाल ही में चोरी की नीयत से रात्रि के 11:00 बजे वृक्षारोपण के लिए बाहर से लाए गए पौधों को सैदनपुर नर्सरी पर उतर रहे वन कर्मियों को गाली गलौज और धमकियां दी गई जिसकी लिखित तहरीर वनकर्मी द्वारा थाना सफदरगंज में दी गई हैं । जिसमें अभी तक कार्यवाई जीरो है इसीलिए इनके मनोबल बड़े हुए हैं प्रात: चार बजे सुबह से टिपटॉप होकर यह यूट्यूब चैनल के पत्रकार सुबह से ही बैग टांगे निकल जाते हैं जैसे कि बड़े लाइव कवरेज में जा रहे हैं यह तथाकथित पत्रकार लोगों को बड़े-बड़े बोल बचन देते हैं।अपने आपको बताते हैं जिले का सबसे बड़ा पत्रकार । जो कार्य पुलिस को करना चाहिए वह कार्य यहां के संगठित तथाकथित पत्रकार रातों दिन कर रहे है कुछ संस्थाआ तो ऐसी है जो 1000 रुपये से लेकर 5000 हजार रुपये जमा करवाकर अपनी संस्थान का कार्ड भी बना देती है । इन फर्जी पत्रकारों ने विजिटिंग कार्ड भी छपवा रखे है। जो लोग पुलिस की चेकिंग के दौरान उनको प्रेस की धोस भी दिखाते है। इनकी कार्यशैली हमेशा ही संशय के घेरे में रहती है क्योकि जनता और अधिकारियों को, जिस तरह से इन्होने भ्रमजाल में फंसाया हुआ है यह इसका फायदा उठाने से, कभी नही चूक रहे है। क्षेत्र में कोई भी इनसे अछूता नही है जिन्हे इन फर्जी पत्रकारों ने परेशान नही किया हो । अवैध कमाई का जरिया बना चुके पत्रकारिता को इनके द्वारा बदनाम किया जा रहा है।
बानगी के तौर पर देखा जाय तो यह फर्जी पत्रकार वन विभाग को निशाना बना रहे है वन माफियाओं से वसूली के बाद भी फर्जी शिकायते कर रहे है जो अधिकारी इन सबके मन मुताबिक काम नहीं करते तो उनके खिलाफ फर्जी उच्च अधिकारियों से शिकायत करना तथा युट्यटूब पर समाचार प्रकाशित करना ऐसे ही एक मामला सफदरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम मुस्काबाद मे एक महुआ के पेड़ परमिट पर कटा है जिसकी फर्जी शिकायत पर जिला प्रभागीय वन अधिकारी आकाश दीप बाघवान के निर्देश पर 17 मार्च को उप वन प्रभागीय वनाधिकारी अवधेश कुमार वर्मा ने जांच किया तो परमिट मिला। इसी दिन मीरपुर मैं तीन महुआ दो आम के पेड़ कटने की शिकायत पर पहुंचे अधिकारियो ने बताया कि शिकायत थी जिस पर मेरे द्वारा मौके की जांच की गई तो मौके मंत्र एक पेड़ आम का काटा था जिस पर शिकायत से पूर्व ही वन कैश सख्या 92/ 25-26 एक पेड़ का जुर्माना किया जा चुका था। इसी तरह ग्राम सिकली का पुरवा मजरे वनगाँवा मे पूर्व प्रधान छोट्टन की आम की बाग में 10 आम के पेड़ो की शिकायत मे 4 पेड़ कटे पाये गये जिनका वन कैश संख्या 93 / 25-26 पूर्व मे जुर्माना पाया गया। ग्राम अहिरनपुरवा मे एक माह पूर्व पीपल, पाकड़ बरगद नीम, महुआ, जामुन पेड़ काटने की फर्जी शिकायत की गई जबकि मौके पर चार जामुन एक गूलर कटे पाये गऐ जो उक्त पेड़ो का माह जनवरी मे परमिट के बाद पेड़ काटे गये थे। वही रामनगर रेंज के ग्राम शहादतगंज मे रामलीला मैदान के दो पेड़ परमिट से काटे गये है जो पुलिस एवं वन अधिकारियो की फर्जी शिकायत कर उच्च अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा हैं। और उप वन क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार यादव एवं पुलिस चौकी प्रभारी सैदनपुर विभूति कुमार द्विवेदी के खिलाफ फर्जी मनगढ़ंत कहानी गढकर अधिकारियों व समाज में छवि धूमिल कर रहे ।
अब सोचने वाली बात है कि यह लोग पत्रकारिता के स्तर को निम्न करने में लगे हुए है। जिसका खामियाजा सही और प्रोफशनल पत्रकार भुगत रहे है। अब देखना यह है कि इस तरह के फर्जी पत्रकारों के जमावडे के रोकथाम के लिए प्रशासन क्या कर सकता हैं ।

