मिट्टी के अवेध धंधे ने छीन ली एक मां की जिंदगी: बाराबंकी की सड़कों पर दौड़ते मौत के डंपर”* कब रुकेगा यह मिट्टी का कारोबार?

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

बाराबंकी की सड़कों पर आज फिर एक मां की सांसें थम गईं… और पीछे छूट गया एक बेटा, जो अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी से जंग लड़ रहा है।
रविवार की सुबह, जो किसी आम दिन की तरह शुरू हुई थी, देखते ही देखते एक परिवार की दुनिया उजड़ गई। जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के अंबरपुर के पास, मिट्टी से लदा एक तेज रफ्तार डंपर मौत बनकर दौड़ा और उसने एक मां को हमेशा के लिए अपने बेटे से छीन लिया।
मसौली निवासी बृजमोहन अपनी 45 वर्षीय मां मुन्नी देवी को लेकर बहन के घर जा रहे थे। रास्ते में शायद उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि यह सफर आखिरी साबित होगा। पीछे से आए डंपर ने उनकी बाइक को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि मां सड़क पर गिर गईं… और अगले ही पल डंपर के पहिए उनकी जिंदगी को कुचलते हुए आगे बढ़ गए।
बेटा तड़पता रह गया… मां की आंखें हमेशा के लिए बंद हो गईं।
घटना के बाद चालक डंपर छोड़कर भाग गया जैसे सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी से भी फरार हो गया हो।
लेकिन सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं है… सवाल उन सैकड़ों डंपरों का है जो दिन-रात त्रिलोकपुर चौकी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में बेखौफ दौड़ रहे हैं। महीनों से अवैध मिट्टी खनन का यह खेल जारी है—और हर गुजरते दिन के साथ सड़कों पर मौत का खतरा और गहराता जा रहा है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि ये डंपर इतनी तेज रफ्तार में चलते हैं कि आम आदमी का सड़क पर निकलना भी खतरे से खाली नहीं। हादसे अब “खबर” नहीं रहे—बल्कि एक कड़वी सच्चाई बन चुके हैं।
आज मुन्नी देवी गई हैं…
कल कौन होगा?
यह सवाल हर उस मां, हर उस बेटे और हर उस परिवार के दिल में गूंज रहा है, जो इन सड़कों से गुजरने को मजबूर है।
*कब रुकेगा यह मिट्टी का कारोबार?*
कब थमेगी यह रफ्तार जो जिंदगी को रौंद रही है?
जब तक जवाब नहीं मिलता…
तब तक बाराबंकी की सड़कों पर हर गुजरता डंपर, सिर्फ मिट्टी नहीं बल्कि किसी की सांसें भी ढोता नजर आता रहेगा।

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