डॉ. अमोल गुप्ता ने बताया सूर्य मुद्रा और कपालभांति का शक्तिशाली संयोजन: _लाभ, नुकसान और सावधानियों पर विशेष चिकित्सकीय परामर्श_   होम्योपैथी और योग का अनूठा तालमेल 

मुकीम अहमद अंसारी

सहसवान,बदायूं। उत्तर प्रदेश: प्राचीन योग मुद्राओं को प्राणायाम के साथ मिलाना स्वास्थ्य के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है, लेकिन इसके लिए सही चिकित्सकीय समझ का होना बेहद जरूरी है। डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल, सहसवान के प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक एवं योग विशेषज्ञ डॉ. अमोल गुप्ता ने आज ‘सूर्य मुद्रा’ और ‘कपालभांति प्राणायाम’ के सम्मिलित अभ्यास को लेकर एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है।

डॉ. गुप्ता के अनुसार, यह संयोजन शरीर में तेजी से असर दिखाता है, लेकिन दोनों की प्रकृति अत्यधिक गर्म (उष्ण) होने के कारण यह एक दोधारी तलवार की तरह है।

 

आम जनता की जागरूकता के लिए डॉ. गुप्ता द्वारा साझा किए गए मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

 

वैज्ञानिक व योगिक प्रक्रिया (The Mechanism) सूर्य मुद्रा बनाने के लिए अनामिका उंगली (पृथ्वी तत्व) को अंगूठे (अग्नि तत्व) की जड़ में दबाया जाता है, जिससे शरीर में आंतरिक तापमान बढ़ता है। जब इसके साथ कपालभांति (तेजी से सांस बाहर फेंकने की क्रिया) को जोड़ा जाता है, तो शरीर में थर्मल इफेक्ट (ऊर्जा व गर्मी) कई गुना बढ़ जाता है।

अभ्यास के मुख्य लाभ (Therapeutic Benefits) डॉ. अमोल गुप्ता ने बताया कि यदि इस संयोजन को सही तरीके और विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाए, तो इसके चमत्कारी परिणाम मिलते हैं:

 

तेजी से वजन और चर्बी घटाना: यह संयोजन शरीर के मेटाबॉलिज्म रेट को तेजी से बढ़ाता है और जठराग्नि को तीव्र करता है, जिससे पेट की जिद्दी चर्बी और मोटापा कम होता है।

 

थायराइड (Hypothyroidism) में सुधार: सूर्य मुद्रा सीधे थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करती है। कपालभांति के साथ मिलने से यह सुस्त थायराइड ग्रंति को सक्रिय करने में मदद करती है।

 

कोलेस्ट्रॉल और शुगर पर नियंत्रण: यह अभ्यास लिवर और पैंक्रियाज को सक्रिय करता है, जिससे खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।कब्ज और विषैले तत्वों से मुक्ति: इससे पेट की मांसपेशियों टोन होती हैं, पुरानी कब्ज दूर होती है और शरीर से हानिकारक टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं।

 

आलस्य और थकान का नाश: यह शरीर की प्रत्येक कोशिका में ऊर्जा का संचार करता है। क्रोनिक फटीग (पुरानी थकान) और सुस्ती से जूझ रहे लोगों के लिए यह एक अचूक उपाय है।

 

संभावित हानियाँ और नुकसान (Adverse Risks)” चूंकि ये दोनों ही क्रियाएं प्रकृति में बेहद गर्म हैं, इसलिए शरीर में ‘पित्त दोष’ असंतुलित होने पर इसके गंभीर नुकसान भी हो सकते हैं,” डॉ. गुप्ता ने चेतावनी देते हुए बताया:

 

अत्यधिक आंतरिक गर्मी और एसिडिटी: इसका ज्यादा अभ्यास करने से सीने में तेज जलन, हाइपर-एसिडिटी और पेट में मरोड़ उठ सकती है।

 

त्वचा पर गंभीर असर: शरीर की गर्मी अचानक बढ़ने से चेहरे पर कील-मुंहासे (Pimples), रैशेज और दाने निकल सकते हैं।

 

नाक से खून आना (Epistaxis): उच्च रक्तचाप और अत्यधिक गर्मी के कारण नाक की नाजुक रक्त वाहिकाएं फट सकती हैं, जिससे अचानक नकसीर फूट सकती है।

 

चक्कर आना और बेचैनी: कपालभांति को बहुत तेज गति से सूर्य मुद्रा के साथ करने पर उच्च रक्तचाप के मरीजों को अचानक चक्कर या घबराहट हो सकती है।

 

होम्योपैथी और योग का अनूठा तालमेल (How Homoeopathy Complements the Practice) इस विषय पर होम्योपैथी के महत्व को जोड़ते हुए डॉ. अमोल गुप्ता ने विशेष रूप से कहा :

_”होम्योपैथी और यह योगिक अभ्यास एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करते हैं। जब कोई व्यक्ति सूर्य मुद्रा और कपालभांति से अपना वजन घटाने या थायराइड ठीक करने का प्रयास करता है, तो होम्योपैथिक दवाएं शरीर की आंतरिक जीवनी शक्ति (Vital Force) को जागृत कर इस प्रक्रिया को गति देती हैं। यदि इस अभ्यास के कारण शरीर में अत्यधिक गर्मी, एसिडिटी या पित्त बढ़ता है, तो होम्योपैथी में ऐसी अत्यंत सुरक्षित दवाएं मौजूद हैं जो बिना किसी दुष्प्रभाव के शरीर के तापमान और पाचन को संतुलित कर देती हैं। योग जहां शरीर को बाहर से सुदृढ़ बनाता है, वहीं होम्योपैथी आंतरिक रूप से दोषों को शांत कर संपूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करती है।”_

 

कड़े दिशा-निर्देश और सावधानियां (Precautions & Contraindications)* मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डॉ. अमोल गुप्ता ने निम्नलिखित सख्त निर्देश जारी किए हैं:

 

इनके लिए पूरी तरह वर्जित: उच्च रक्तचाप (High BP), गंभीर हृदय रोग, हर्निया, पेट में अल्सर या हाल ही में पेट की सर्जरी कराने वाले लोग इसका अभ्यास कतई न करें।

 

महिला स्वास्थ्य: गर्भवती महिलाओं और मासिक धर्म (Periods) के दौरान महिलाओं के लिए यह अभ्यास पूरी तरह प्रतिबंधित है।

 

मौसम के अनुसार बदलाव: गर्मियों के मौसम में इसका अभ्यास अधिकतम 3 से 5 मिनट ही करें। सर्दियों में इसे बढ़ाकर 10 से 15 मिनट किया जा सकता है।

 

हाइड्रेशन (पानी की मात्रा): इस अभ्यास को करने वाले लोगों को दिनभर में पर्याप्त पानी पीना चाहिए ताकि शरीर की बढ़ी हुई गर्मी शांत हो सके।

 

डॉ. अमोल गुप्ता का निष्कर्ष: _”होम्योपैथी और योग, दोनों ही बीमारी को जड़ से ठीक करने में विश्वास रखते हैं। लेकिन सूर्य मुद्रा और कपालभांति जैसे उग्र संयोजनों को कभी भी बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से शुरू नहीं करना चाहिए। अभ्यास से पहले व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) का मूल्यांकन करना बेहद जरूरी है।”_

 

*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

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