विभीषिका दिवस गुमनाम शहीदों को याद किया गया।  14 अगस्त 1947 को जो बटवारा हुआ था उसे बटवारे की टीस आज भी हमारे दिलों में है।

मुकीम अहमद अंसारी

सहसवान, बदायूं। 14 अगस्त को मनाया गया विभीषिका दिवस गुमनाम शहीदों को याद किया गया।

14 अगस्त 1947 को जो बटवारा हुआ था उसे बंटवारे की टीस आज भी हमारे दिलों दिमाग में रहती है एक लकीर ने अपनों को पराया कर दिया था किसी ने अपना भाई खोया किसी ने अपने बच्चों खोया या खोया अपनों के पास आया आंखों में आंसू और हाथों में एक थैला खाली रेलगाड़ी में आए तो जरूर लेकिन उसमें लाशों के सिवा कुछ नहीं था पाकिस्तान और बंगाल की धरती खून से नहा चुकी थी कार्यक्रम में भारत माता के नारे एवं वंदे मातरम के नारे एवं शपथ हम भले ही टुकड़ें वाले ही भारत में पैदा हुए हो लेकिन हमारी जब मौत को तो अखंड भारत में हाथों में मोमबत्ती ओर दिए लिए हुए गुमनाम शहीदों को याद किया गया मौन धारण किया गया मंच की दुआ पढ़ी गई अंत में राष्ट्रगान हुआ यह कार्यक्रम शहीद स्थल खूनी इमली मंडी समिति के सामने हुआ

कार्यक्रम में उपस्थित मंच के कार्यकर्ता प्रांत संयोजक मोहम्मद कमर चौधरी प्रकोष्ठ और जड़ों से जुड़े ब्रज प्रांत डॉक्टर हैकल नबी नकवी मीर मुशर्रफ अली एडवोकेट नूर मोहम्मद राजू कुरैशी सलमान हैदर नकवी शपथ सुभाष गौड ने कराई।

 

*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

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