सहसवान,बदायूं। 15 अगस्त 2026 को 80वां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शनिवार सुबह 9:00 बजे मदरसा अनवारे मदीना, सहसवान में ध्वजारोहण किया गया।
इस अवसर पर मदरसे के सदर मुदर्रिस मौलाना वसीमुल हक़ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में अनेक धर्मों के लोग रहते हैं और सभी अपने-अपने धर्मों के अनुसार त्योहार मनाते हैं। लेकिन कुछ त्योहार ऐसे भी हैं जिन्हें हर धर्म और हर समुदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के मनाते हैं। इन्हें हम राष्ट्रीय त्योहार कहते हैं। स्वतंत्रता दिवस हमारे देश का ऐसा ही एक बहुत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय त्योहार है।
वास्तव में 15 अगस्त 1947 से पहले हम अंग्रेज़ों के गुलाम थे। वे हमें तरह-तरह से लूट रहे थे और हर मामले में अपनी मनमानी करते थे। जो हम चाहते थे, उसे वे नहीं होने देते थे। लगभग 200 वर्षों तक उन्होंने हमारे देश पर इसी तरह का ज़ालिमाना शासन किया और हमारे देश को लूटा।
देश के नेताओं ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर उनसे मुक्ति पाने का आंदोलन चलाया, जिसे “स्वतंत्रता आंदोलन” कहा गया। अंग्रेज़ भी अच्छी तरह समझ गए थे कि अब वे ज़्यादा दिन तक भारत पर शासन नहीं कर सकेंगे। अंततः हमारे नेताओं का संघर्ष रंग लाया और 15 अगस्त 1947 को भारत उनकी गुलामी से आज़ाद हो गया। उसी दिन लाल किले पर हमारा राष्ट्रीय ध्वज “तिरंगा” फहराया गया। भारत ने आज़ादी की खुली हवा में सांस ली और सभी ने राहत महसूस की।
इस आज़ादी के लिए हमारे अनेक बुज़ुर्गों और उलेमाओं ने अपनी जान की कुर्बानी दी। बच्चों और महिलाओं सहित बहुत से लोग घायल हुए। अनगिनत लोगों ने जेल की सज़ा काटी। इन्हीं कुर्बानियों के परिणामस्वरूप 14 अगस्त 1947 की रात 12 बजे हमें आज़ादी प्राप्त हुई।
इस अवसर पर मदरसे के छात्रों ने कविता पाठ किया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मदरसे के नाज़िम-ए-आला क़ारी मोहम्मद मुसीम रज़ा ने भी संबोधन दिया। कार्यक्रम का समापन देश की शांति और अमन-चैन की दुआ के साथ हुआ। अंत में सभी छात्रों को मिठाई वितरित की गई।
इस अवसर पर हाफ़िज़ रफ़ीक, हाफ़िज़ मुशर्रफ़ बरकाती, हाजी ताहिर, हाजी असरार आदि उपस्थित रहे।
*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

