चीन से कब आंख में आंख डालकर बात करेंगे मोदी? चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर सर्जिकल स्ट्राइक की राह देखती भारतीय जनता!
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़24टाइम्स के साथ
बीते कुछ सप्ताह से पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा के नज़दीक भारत और चीन की सेनाएं आमने सामने हैं। दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़पें होने की भी ख़बरें हैं। भारत ने इससे पहले कहा था कि वो वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान करता है लेकिन इस इलाक़े में हाल में चीनी पक्ष अधिक सक्रिय हुआ है वह भारत की पट्रोलिंग में भी बाधा डाल रहा है। इन सबके बावजूद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह कड़ा रुख जो वह पाकिस्तान को लेकर दिखाते हैं चीन के सामने बिल्कुल दिखाई नहीं दे रहा है
बीते कई सप्ताह से भारत और चीन के बीच तनाव अपने चरम पर है। भारत और चीन के हज़ारों सैनिक अक्साई चीन में स्थित गलवान और पेनगॉन्ग सो झील के इलाक़े में आमने सामने तैनात हैं। गलवान घाटी को लेकर उस वक़्त तनाव पैदा हो गया जब भारत ने आरोप लगाया कि गलवान घाटी के किनारे चीनी सेना ने कुछ टेंट लगाए हैं। गलवान घाटी लद्दाख और अक्साई चीन के बीच भारत-चीन सीमा के नज़दीक स्थित है। यहां पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) अक्साई चीन को भारत से अलग करती है। यह घाटी चीन के दक्षिणी शिनजियांग और भारत के लद्दाख़ तक फैली है। इसके बाद भारत ने वहां सेना की तैनाती बढ़ा दी। दूसरी ओर चीन ने आरोप लगाया कि भारत गलवान घाटी के पास सुरक्षा संबंधी ग़ैर-क़ानूनी निर्माण कर रहा है। इससे पहले नौ मई को नॉर्थ सिक्किम के नाथू ला सेक्टर में भारतीय और चीनी सेना में झड़प हुई थी। वहीं भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी देर से ही सही पर यह स्वीकार किया है कि भारत चीन सीमा पर इस समय चीन और भारत के बीच विवाद है और बड़ी संख्य़ा में चीन के सैनिक भारतीय सीमा पर मौजूद हैं।

भारत-चीन सीमा पर ताज़ा हालात के बारे में पूछे गए सवाल पर राजनाथ सिंह ने कहा, ‘हाल फिलहाल की जो घटना है, यह बात सच है कि सीमा पर इस समय चीन के लोग भी, उनका दावा है कि हमारी सीमा यहां तक है, भारत का यह दावा है कि हमारी सीमा यहां तक है, उसको लेकर एक मतभेद हुआ है और अच्छी खासी संख्या में चीन के लोग भी आ गए हैं।’ राजनाथ सिंह ने कहा, ‘लेकिन अपनी तरफ़ से भारत को जो कुछ भी करना चाहिए, भारत ने भी किया है।’ राजनीतिक टीकाकारों का कहना है कि चीन के मामले पर यह वही राजनाथ सिंह का बयान है जो बात-बात पर पाकिस्तान को कड़े जवाब की चेतावनी देते रहते हैं। चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुसते चले आ रहे हैं और भारत की मोदी सरकार सहित इस देश का मीडिया भी इस मामले को बहुत ही हल्का करके पेश करने की पूरी कोशिश में लगा हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यही ग़लती कहीं पाकिस्तानी सैनिकों ने कर दी होती तो अब तक भारतीय प्रधानमंत्री मोदी सहित उनकी सरकार के सभी मंत्री और नेता भारतीय मीडिया की मदद से पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक नामक हमले को कई बार अंजाम दे चुके होते।

इस बीच चीन के अख़बार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ चीन की सेना की तिब्बत कमांड ने ऊंचाई पर सैन्य अभ्यास किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पीपुल्ज़ लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने 4700 मीटर की ऊंचाई पर दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर हमला करने का अभ्यास किया। रात में क़रीब एक बजे किए गए अभ्यास में मुश्किल वातावरण में अंधेरे में हमला करने का अभ्यास किया गया। इस अभ्यास के बारे में चीन के सरकारी टीवी पर भी रिपोर्ट प्रसारित की गई है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत और चीन ऊंचाई क्षेत्र में सीमा साझा करते हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सीमा पर घटनाएं हुई हैं और दोनों ही देशों ने अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है।’ इस बीच भारतीय सांसद और एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवेसी ने भारत की नरेंद्र मोदी सरकार पर ज़ोरदार हमला करते हुए कहा है कि, चीन ने भारत की ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया है लेकिन देश के प्रधानमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब चीन की बात आती है तो भारतीय जनता पार्टी गूंगी हो जाती है। ओवैसी ने कहा कि यह पहली बार है कि इतनी बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों ने भारत में घुसपैठ की है लेकिन भारत की मोदी सरकार के साथ-साथ भारतीय मीडिया भी उसपर ख़ामोशी बनाए हुए है।
भारत के मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत आरंभ से ही चीन के मामले में पाकिस्तान के मुक़ाबले में कम आक्रमकता दिखाता आया है। इस बात को स्वयं भारतीय प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी ने भी 2014 के चुनाव में मुद्दा बनाया था। उन्होंने उस समय की मनमोहन सरकार पर यह आरोप लगाए थे कि वह चीन से आंख में आंख डाल कर बात नहीं करते हैं। मोदी ने कहा था कि हमारी सरकार दिल्ली में आई तो हम चीन से आंख में आंख डालकर बात करेंगे। जानकारों के मुताबिक़, हाल के दिनों में चीन ने जिस प्रकार भारतीय सीमा में घुसपैठ की है और भारत की मोदी सरकार ने जिस प्रकार चुप्पी साध रखी है इससे पहले किसी भी सरकार ने चीन के मुक़ाबले में इतनी कमज़ोर नीति नहीं अपनाई थी। भारत सरकार इस समय भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव की सही जानकारी भी अपने देश की जनता को नहीं दे पा रही है या देने से कतरा रही है। यही हाल भारतीय मीडिया का है जो न जाने कितनी बार पाकिस्तान को छोटी सी छोटी बात पर तबाह कर देने की बात करता है लेकिन चीन के मामले पर मोदी सरकार की तरह ख़ामोश रहने को ही अपनी ज़िम्मेदारी मानता है।

