आख़िर भारत में हर मामले को संप्रदायिक रंग क्यों दिया जाने लगा है? राजनेताओं के साथ-साथ भारतीय मीडिया भी झूठ और नफ़रत फैलाने में सबसे आगे!
शमीम अंसारी बाराबंकी: एसएम न्यूज24टाइम्स
आजकल भारत में एक हथिनी की मौत पर ख़ूब हंगामा मचा हुआ है। सोशल मीडिया के ज़रिए आग की तरह फैली इस ख़बर को लेकर जहां हर ओर हथिनी के मौत के कारणों को लेकर निंदा का दौर जारी है वहीं इस घटना को संप्रदायिक रंग भी दिया जाने लगा है।
बता दें कि बीती 27 मई को भारतीय राज्य केरल के पलक्कड़ ज़िले में एक गर्भवती हथिनी की मौत हो गई थी, बताया गया था कि वह कथित तौर पर पटाखे खिलाए जाने से गंभीर रूप से घायल हो गई थी। कांग्रेस ने भाजपा नेताओं पर इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा सांसद मेनका गांधी पर इस घटना को लेकर दंगा फैलाने की मंशा का मामला दर्ज किया गया है। इस बीच गर्भवती हथिनी की मौत के मामले में कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणी को लेकर केरल ने भाजपा सांसद मेनका गांधी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेनका गांधी ने दंगा भड़काने के उद्देश्य से मलप्पुरम के लोगों के ख़िलाफ़ आधारहीन आरोप लगाए हैं। भारतीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, इस संबंध में मेनका गांधी के ख़िलाफ़ केरल की मलप्पुरम पुलिस को सात से अधिक शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद यह मामला दर्ज किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
तीन जून को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में भाजपा नेता मेनका गांधी ने कहा था, ‘मल्लपुरम एक ऐसा ज़िला है, जो पूरे देश में शायद सबसे ज़्यादा अशांत है। हर दिन कोई नया कांड मल्लपुरम में होता है। वहां के लोग बड़ी संख्या में जानवरों को मारते हैं। इस क्षेत्र के लोग जंगलों में ज़हर फेंक देते हैं जिसके कारण हज़ारों जानवर एक साथ मर जाते हैं।’ अपने वीडियो ट्वीट में मेनका गांधी मल्लपुरम के लोगों पर आरोप लगाते हुए कहती हैं कि, ‘ वहां के लोग चिड़ियों को मारते हैं, कुत्तों को मारते हैं, वहां रोज़ के रोज़ मारा-पीटी होती है, इतनी सारी औरतों को मार चुके हैं, यह हिंदू-मुस्लिम लड़ाई करके लोगों के बाज़ू काट देते हैं, मल्लपुरम की बहुत भयानक स्थिति है।’ मेनका गांधी के अनुसार, ‘ऐसा लगता है कि केरल की सरकार उनसे डरती है, क्योंकि वहां कोई भी कार्रवाई नहीं होती है, प्रशासन के जो सबसे कमज़ोर लोग हैं, उन्हें मल्लपुरम भेजा जाता है।’ इस बीच भारत के अंग्रेज़ी भाषा के समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2014-15 और 2018-19 के बीच पांच साल की अवधि में अप्राकृतिक कारणों- जैसे करंट लगने, शिकार और ज़हर देने से 490 हाथियों की मौत हुई।
इस बीच मीडिया से बातचीत में केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने इस बात की ओर इशारा किया था कि मल्लपुरम का नाम इस घटना से जोड़ने की कोशिश इसलिए की गई थी, क्योंकि यह केरल का एकमात्र मुस्लिम बहुल ज़िला है। उन्होंने कहा था कि केंद्रीय मंत्रियों सहित कुछ लोग घटना का इस्तेमाल राज्य की छवि ख़राब करने के लिए कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस दुखद घटना का इस्तेमाल नफ़रत और कट्टरता फैलाने के अभियान के लिए किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ‘पलक्कड़ ज़िले में हुई दुखद घटना में एक गर्भवती हथिनी की जान चली गई। बहुत सारे लोग हमारे पास आए, हम उनसे कहना चाहते हैं कि आपकी चिंताएं बेकार नहीं जाएंगी न्याय मिलेगा।’ केरल के मुख्यमंत्री का कहना है कि, ‘हम इस तथ्य से दुखी हैं कि कुछ लोगों ने इस घटना का इस्तेमाल घृणा फैलाने के लिए किया है। उन्होंने मीडिया की ओर इशारा करते हुए कहा कि, ग़लत विवरणों और आधे-अधूरे सच पर आधारित झूठ से सच को रोकने के लिए इस घटना का इस्तेमाल किया गया, इस घटना से कुछ लोगों ने कट्टरता फैलाने की भी कोशिश की है।
आपको बता दें कि कल तक भारत में गायों को लेकर इस देश के अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता रहा है, लेकिन केरल में गर्भवती हथिनी की मौत के बाद अब हाथियों की मौत को लेकर भी मुसलमानों को निशाना बनाया जाने लगा है। कई भारतीय न्यूज़ चैनलों ने तो हथिनी की मौत के पीछे मुसलमानों की साज़िश और मुसलमानों द्वारा अंजाम दी गई घटना जैसे शब्दों का प्रयोग किया। जबकि इस मामले में अभी तक एक विल्सन नाम के व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है, जो घटनास्थल के पास स्थित अंबालापरा में खेती का काम करता है। इधर कुछ वर्षों से जबसे भारत में कट्टरपंथी विचाधारा वाली भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाई है तबसे इस देश में कट्टरवाद, संप्रदायिकता और हर घटना को धार्मिक रंग दिए जाने का चलन सा चल गया है। भारत में संप्रदायिकता और कट्टरता फैलाने में जितना हिन्दू कट्टरपंथी गुटों का हाथ है उतना ही इस देश का मीडिया भी भारत में नफ़रत की आग को हवा देने में आगे-आगे है।
शमीम अंसारी बाराबंकी: एसएम न्यूज24टाइम्स

