देवा मजार शरीफ दरगाह जायरीनों के लिए खुला -जायरीनों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ दिया जा रहा है प्रवेश

रियाज वारिस एस0एम0न्यूज 24 टाइम्स

-एक बार में सिर्फ 5 जायरीनों के जाने की अनुमति

देवा शरीफ। विश्व के को

ने-कोने में पैगामे मुहब्बत फैलाकर तमाम दिलों को एक दूसरे से जोड़ने वाले इंसानियत और भाईचारे के रहनुमा देवा शरीफ के सूफी संत हाजी वारिस अली शाह का लाॅकडाउन के दौरान बंद रौजा-ए-मुबारक पूरे 100 दिन के बाद शुक्रवार को बाद नमाजे जुमा के बाद जायरीनों की जियारत के लिए खोल दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोविड-19 से बचाव के मद्देनजर यहां सावधानी के तौर पर पर्याप्त व्यवस्था की गई, मसलन तुरबत शरीफ के पास जाने की किसी को इजाजत नहीं है। एक समय में केवल 5 जायरीन ही मजार शरीफ के अन्दर दाखिल हो सकते हैं, तुरबत शरीफ से पहले बरामदें तक ही जायरीन जा सकते हैं। जब पांच जायरीन जियारत के बाद वापसी करेंगे उसके बाद ही दूसरे पांच जायरीन को दाखिल होने की इजाजत है। इसके अलावा मुख्य गेट पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लोग जमा रहेंगे, जो भी अंदर दाखिल होगा उसकी थर्मल स्क्रीनिंग एवं सेनेटाइज किये जाने की व्यवस्था यहां पर प्रभावी है। मजार शरीफ पर शीरीनी, चादर वगैरह पेश करने की बिल्कुल मनादी है। केवल जियारत के लिए मजार शरीफ में दाखिला मिल सकता है। ईसवी 1905 में वारिस पाक के दुनिया से तशरीफ ले जाने के बाद कभी कभी कोई भी ऐसा मंजर नहीं देखा गया कि आपका मजार शरीफ बन्द किया गया हो। विश्व स्तर पर कोविड-19 यानी कोरोना वायरस महामारी फैलने के बाद भारत सरकार के दिशा निर्देशन में बचाव के मद्देनजर लाॅकडाउन लागू हुआ। राष्ट्र के सभी धार्मिक स्थल बंद हुए जिनमें वारिस पाक की दरगाह भी शामिल थी, और शासन की तरफ से सभी धार्मिक स्थलों के खुलने की जब इत्तिला मिली उसके बाद ही सभी के साथ-साथ देवा मजार शरीफ भी जायरीनों व अकीदत मंदों के लिए खोल दिया गया है।
वर्तमान समय में जायरीनों का आगमन हो रहा है किन्तु लाकडाउन का असर देवा शरीफ में देखने को मिल रहा है जहां पर बाहरी दुकान व जायरीन नही आ पा रहे हैं सिर्फ आस-पास के जनपदों व क्षेत्रीय जायरीनों के जियारत का सिलसिला चालू हो गया है।

 

रियाज वारिस
एस0एम0न्यूज 24 टाइम्स

 

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