बुनकरो की समस्या को लेकर वसीम राईन ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी

बाराबंकी। लाक डाउन के दौरान बुनकर भुखमरी के कगार पर पहुँच चुके है। बुनकरो को सरकार की तरफ से कोई भी मदद नही मिली। जिसको लेकर ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद वसीम राईन ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। महाज के प्रदेश अध्यक्ष ने ज्ञापन में कहा है कि प्रदेश में खेती के बाद सबसे अधिक रोजगार बुनाई उद्योग से मिलता है। उन्होंने आगे कहा की विगत 90 दिनों से बुनकरों का करघा बंद है। जिसके कारण बुनकर मजदूर भूखमरी करने पर विवश हैं। अब जबकि लॉक डाउन में कुछ छूट मिली है तो बुनकरों द्वारा तैयार माल बेचने केलिए जो देश के विभिन्न शहरों में लॉक डाउन के पूर्व भेजा गया था वापस आ रहा है। ऐसी भयावह स्थिति में मजदूर बुनकरों के करघा पूर्णतः बंद हो गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से उम्मीद जताई है की पत्र मिलने के बाद इस पार सहानुभूति पूर्वक विचार करके अविलंब बुनकरों को भुखमरी या आत्महत्या जैसी स्थिति से अवश्य बचाएंगे उन्होंने कहा है कि करघा पर तैयार होने वाले कपड़े पर 5ः जीएसटी बुनकर अदा करता है। यदि बुनाई उद्योग बंद होता है तो जहां लाखों परिवार बेरोजगार होगा वही जीएसटी द्वारा करोड़ों रुपया मिलने वाली धनराशि भी बंद हो जाएगी। जिससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ेगा। श्री राईन ने कहा पूर्व में प्रति लूम पर मिल रही सब्सिडी के स्थान पर, मीटर रीडिंग पर सब्सिडी देने के निर्णय को वापस लिए जाने लॉकडाउन से बदहाल बुनकरों/पसमांदा को भुखमरी या आत्महत्या जैसी स्थिति से बचाने केलिए प्रति बुनकरध्पसमांदा परिवार धनराशि 12000 अनुदान के रूप में दिए जाने बुनकरों का 6 माह का बिजली बिल माफ किए जान अनुसूचित जाति जनजाति बुनकरों केलिए बन रही लाभकारी योजनाओं में अन्य पिछड़े वर्ग क बुनकरों को भी शामिल किए जाने का अनुरोध किया है। इस मौके पर महाज के जिलाध्यक्ष नसरुद्दीन अंसारी, अल्ताफ हुसैन, सलमानी, जुबेर सलमानी, एडवोकेट उमेश रावत, खुर्शीद अंसारी आदि लोग मौजूद रहे।

सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी

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