कोर्ट का प्रेम विवाह करने वालों की हिफाजत में अहम फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की एक नजीर के हवाले से कहा है कि मर्जी से विवाहित बालिग जोड़े की जिंदगी में किसी का दखल नहीं होना चाहिए।अदालत ने इस अहम विधि व्यवस्था के साथ मर्जी से शादी करने वाले बालिग दंपती के शांतिपूर्ण जीवन व आजादी में दखल न देने के निर्देश संबंधित अफसरों को दिए हैं।इस जोड़े ने कोर्ट में सुरक्षा को लेकर गुहार लगाई थी।न्यायमूर्ति अनिल कुमार और न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा की खंडपीठ ने यह अहम फैसला हरदोई जिले के विवाहित जोड़े की याचिका का निस्तारण करते हुए सुनाया।याचियों के वकील सालिकराम यादव का कहना था कि याची जोड़े ने स्वेच्छा से बीती 20 जून को हिंदू रीति रिवाज से आर्य समाज मंदिर में विवाह किया।बालिग होने के सबूत के तौर पर दोनों ने अपनी उम्र संबंधी और विवाह के प्रमाणपत्र याचिका के साथ पेश किए।याचियों के वकील ने कहा कि दोनों शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन बिता रहे हैं।अभी तक दोनों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं है।इसके बावजूद युवती के पिता उनकी शादी से नाराज होकर संबंधित थाने की पुलिस की मदद से उनके वैवाहिक जीवन में परेशानी पैदा कर रहे हैं।

