कांग्रेस में छिपे आस्तीन के सांपों का अगला निशाना हैं प्रियंका? अपनी ढपली- अपना राग छेड़ कर चुके हैं राहुल गांधी का नुकसान! प्रियंका गांधी के हर सतर्क कदम पर भारी पड़ती है कई कांग्रेसी नेताओं की बेतुकी बयान बाजी? करना होगा कांग्रेस का ऑपरेशन, तभी मिलेगी मजबूती?
कृष्ण कुमार द्विवेदी (राजू भैया) 8299157913
केंद्र की भाजपा सरकार से विपक्ष के रूप में पूरे देश में आज कांग्रेस ही प्रमुखता से लड़ती दिखती है। कांग्रेस को तब भी इसका उतना लाभ नहीं मिलता जितने की वह हकदार है। साफ है कि कांग्रेस में सारे मोह छोड़कर सख्त ऑपरेशन की जरूरत है! क्योंकि कई बयान वीर अनाप-शनाप राग छेड़ कर पूर्व में राहुल गांधी को नुकसान पहुंचा चुके हैं? शायद अब कांग्रेस में छिपे आस्तीन के सांपों का अगला निशाना प्रियंका गांधी वाड्रा हैं? क्योंकि उनके हर सतर्क कदम पर ऐसे कई नेताओं की मनमानी पूरी कांग्रेस पर भारी पड़ती नजर आती है।
देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार भाजपा की सरकार सफलता के साथ चल रही है ।भाजपा सरकार मजबूत है। उसको प्रचंड बहुमत मिला है। लेकिन एक स्थिति यह भी है कि सामने विपक्ष भी बिखरा -बिखरा है। विपक्ष के कई नेता ऐसे हैं जो भ्रष्टाचार के आरोपों में कई जांचों का अथवा मुकदमों का सामना कर रहे हैं। लेकिन ऐसे माहौल में यदि निष्पक्षता से देखा जाए तो भाजपा सरकार अथवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कांग्रेस ही खुलकर विपक्ष के रूप में लड़ती नजर आती है! वैसे भी देश के लिए तब और अच्छी संभावनाएं होती है जब मजबूत सरकार के सामने मजबूत विपक्ष भी हो और सरकार को मनमानी करने का मौका ना मिले।
कांग्रेस नेता पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सरकार की हर गतिविधि पर हमलावर नजर रखते हैं। लेकिन सत्य यह भी है कि इस हमले को जोरदार बनाने में राहुल एवं प्रियंका की जो कांग्रेसी सेना है वह फेल नजर आती है?
कारण साफ है कि कई नेता अपनी ढ़फली- अपना राग छेड़ने में पीछे नही रहते। कांग्रेस के हालात बयां करते हैं कि बयान वीर नेताओं ने कांग्रेस में छिपे आस्तीन के सांप के रूप में पूर्व में राहुल गांधी को काफी नुकसान पहुंचाया? जी हाँ शायद ये राहुल गांधी को मजबूत नेता के रूप में देश के सामने स्थापित नहीं होने देना चाहते थे? अब कहीं इनका अगला निशाना प्रियंका गांधी वाड्रा तो नहीं है? इस पर कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं को सतर्क दृष्टि से देखने की जरूरत है।
ताजा मामला यदि अयोध्या में श्री राम मंदिर के भूमि पूजन का देखा जाए तो इसमें प्रियंका गांधी वाड्रा का जो बयान आया सधा एवं शालीन आया। जबकि कांग्रेस के कई अन्य नेता इस दौरान भी सतही बयानबाजी करके प्रियंका के इस शालीन एवं सधे कदम को डगमगाने के लिए मजबूर कर रहे थे? यूपी में प्रियंका गांधी ने आदिवासियों की हत्या एवं नागरिकता संशोधन बिल के दौरान पुलिस की कार्यवाही तथा हर छोटी बड़ी घटना को संज्ञान में लेते हुए जोरदार हमले किए ।यहां कांग्रेस का प्रदेश स्तर पर ऑपरेशन भी हुआ! स्थिति साफ है कि कांग्रेस में खासकर उत्तर प्रदेश में कुछ जान आती नजर आ रही है? जिससे सबसे ज्यादा परेशान बसपा सुप्रीमो मायावती हैं? सपा भी इस पर आंख गड़ाए हैं!
कांग्रेस के कुछ बड़े नेता संभवत अपने पुराने खोल से निकलने को तैयार ही नहीं है। देश का मिजाज बदला है। कांग्रेस के रणनीतिकारों को इस मिजाज को समझना ही होगा। बदले मिजाज के आधार पर उसे आगे सफलता प्राप्त करने के लिए अपनी रणनीति पर विचार करना होगा। प्रियंका इसके प्रयास भी कर रही हैं।
जबकि राहुल गांधी ने जब कांग्रेस अध्यक्ष के पद से पार्टी की हार के बाद इस्तीफा दिया था तो उनका यह संदेश था कि पार्टी के कई पदों पर कुंडली मारे बैठे कई बड़े नेता भी अपने पदों से शर्म खाकर हट जाए? लेकिन ऐसे कई नेता बड़े बेशर्म निकले? राहुल गांधी अध्यक्ष पद छोड़ गए लेकिन वह अपने पदों पर कुंडली मारे रहे? जाहिर है कि जब कांग्रेस में नीतिगत नेतागिरी करने वाली पंक्ति ही खत्म हो गई है तो कांग्रेस की मजबूती की बात सोचना ही बेमानी है!
कई कांग्रेसी चर्चा के दौरान कहते हैं कि फलां फलां नेता को पार्टी की जिम्मेदारी अथवा उन्हें उनके पदों से हटा दिया जाए! या फिर दल से बाहर कर दिया जाए! नए लोगों को मौका दिया जाए। समर्पित लोगों को आगे लाया जाए। कांग्रेस फिर से मजबूत हो जाएगी। लेकिन यह करें कौन?

