-सरकारी धन के बंदरबांट के नाम पर हो रहा है बड़ा खेल -कोविड सेन्टर से गायब है मृतक की सोने की चैन, मोबाइल व पैसा

मोहिनी शर्मा, एडवोकेट सम्पादक-एसएम न्यूज 24 टाइम्स

कोरोना के नाम पर हड़पा जा रहा है सरकारी धन व किया जा रहा है जान से खिलवाड़ !

-कोरोना के नाम फैले भ्रष्टाचार की आवाजें अब समाज में उठने लगी हैं।

लखनऊ। कोविड-19 के नाम पर चल रहे प्रदेश में लूट खसोट अब जनता में उजागर होने लगी, धीरे-धीरे सच जनता के सामने आने लगा है, जिसका जीता जागता उदाहरण लखनऊ, बाराबंकी, कानपुर, अयोध्या, रायबरेली, सीतापुर आदि जनपदों में देखने को मिल जायेगा। अब तो हद यहां तक हो गई कि युवा नौजवान व्यक्ति भी कोरोना के नाम भर्ती करके लूट खसोट मचाकर, मांग पूरी न होने पर उसे पाजीटिव घोषित करके खुलेआम लूटा जा रहा हैं, एक मृतक के परिवार के लोगों ने प्रदेश मुख्यमंत्री से लेकर उच्चाधिकारियों को शिकायती प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की मांग की है तथा दोषी सीएमओ व डाक्टरों व लूटेरों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही किये जाने की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार चतुर्भुज कुमार श्रीवास्तव पुत्र स्व0 श्री ब्रह्मदेव लाल श्रीवास्तव निवासी आदिल नगर कालोनी, टेढ़ी पुलिया, थाना गुड़म्बा, जिला लखनऊ जिनकी आयु लगभग 56 वर्ष थी वह उ0प्र0 पी0 डब्लू डी0 में जूनियर इंजिनियर के पद पर थे, उन्हें कोविड पाॅजीटिव दिनांक 19 सितम्बर 2020 को पाया गया था और तबियत बिगड़ने पर उन्हें दिनांक 22 सितम्बर 2020 को इण्ट्रीग्रिल इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस एण्ड रिसर्च, कुर्सी रोड लखनऊ में एडमिट कराया था। उन्हें आईसीयू की जरूरत थी उसके बावजूद उन्हें जनरल वार्ड में रखा गया। एक दिन बीतने के बाद तबियत अधिक खराब होने पर एमआईसीयू में रखा गया, जहाॅं क्रेएटिन के जाॅंच में क्रेटनिन 6.8 था और उनकी कोई भी दवाइयाॅं और इन्सुलिन जो उन्हें रोजाना लगाना होता था वह उन्हें एमआईसीयू में नहीं मिला और बाद में डाक्टर ने बताया कि इन्सुलिन और दवाइयाँ इन्जेक्शन द्वारा दिया जा रहा है। जिन दवाइयों की सूचना किसी को भी नहीं दी की कौन सी दी गयी और मृतक के पुत्रों ने अपने पिता की पूरी मेडिकल रिपोर्ट तक हास्पिटल को दी। अगले दिन जाॅच होने पर क्रेएटिन 5.7 हो गया था अचानक दिनांक 25 सितम्बर की शाम को उनका क्रेएटिन 8.31 बताया गया और उन्होंने डायलिसिस करने के लिये कहा हाॅलाकि यह सुविधा उनके पास उपलब्ध नहीं थी और 24 घण्टे तक दवाइयों और डायलिसिस बेड के लिये दूसरे अस्पताल का पता करने के लिये दौड़ाया। सी0एम0ओ0 आफिस पर शिकायत करने के बाद उन्होंने हमसे बाहर से डायलिसिस किट जबरन मंगाया मृतक के परिवार के लोग किट लेकर जब गये तो वहाॅ के मेडिकल सुप्रिटेन्डेंट आये और अपना बिस्तर कमरे में बिछा के कमरा बन्द करके सो गये और यही कहा कि कन्ट्रोल सेटर से ़बात करो और रात भर इन्तजार कराते रहे और हम लोग इन्तजार करते रहे सुबह 8ः00 बजे का बोलकर उन्होंने डायलिसिस अगले दिन 2ः30 शाम को कराया तब तक उनकी तबियत बहुत बिगड़ चुकी थी। डायलिसिस के बाद तबियत में सुधार लगने पर घर वालों से बात भी की थी।

अचानक दिनांक 27 सितम्बर 2020 को सुबह 11ः00 बजे फोन आया कि उन्हें जल्द से जल्द कुछ दवाइयां चाहिये। पहले उन्होंने ऐसी दवाइयां पहले भी लिखी जो सभी फार्मेसी में नहीं मिल रही थी बाद में शहर के बाहर से दवा को अरेंज किया गया और डाॅक्टर को दिखाने पर उन्होंने यह बताया कि दवा की स्पेलिंग गलत लिख दी गयी थी और दुबारा उन्होंने 5 बजे सही नाम बताया और वो दवा कहां मिल सकती है नहीं बताया। हालांकि शाम 6ः00 के आस पास मृतक के परिवार से बात हुयी तबतक सबकुछ ठीक था। उसके बाद दुबारा दूसरी दवा ढूढने में रात के 11 बज गये। लेकिन वो दवा भी उन्होंने गलत बताया और पिता की तबियत खराब होती गयी फिर दूसरी दवा कई बार पूछने पर बताया और दवा लेकर पहुॅचने पर उन्होंने हमें बोला कि आपके पिता का देहान्त हो गया। आधी से ज्यादा दवाइयों के नाम गलत लिखकर दिया जाता था। देहान्त के बाद उनका कोविड का टेस्ट नहीं हुआ और ना ही उनका पोस्टमार्टम हुआ था। मृतक के परिवार ने सभी दवाइयां बाहर से मंगायी जिसमें एक लाख से ऊपर का खर्च भी आया। उनका जो भी सामान वो साथ में ले गये थे फोन, पैसा, सोने की चैन वजनी लगभग 5 तोला और अंगूठी के साथ सभी चीजें हास्पिटल से चोरी हो गयी है। और अभी तक उन्होंने उसको लेकर कोई भी जानकारी मृतक के परिवार को नहीं दी है।

हमारी जितनी बार भी पापा से ़बात होती थी वह बताते थे कि डाक्टर शायद ही दिन में एक बार उनके नजदीक आते थे। बाकी वह दूर से ही देखकर चले जाते थे। हास्पिटल के डाक्टर उनका बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते थे। हास्पिटल में कोई भी ऐसी सुविधा नहीं है जिससे हम डाक्टर से सीधे बात कर पाये। रोजाना जो भी जाॅचे की गयी और दवाइयां दी गयी उनकी कोई भी जानकारी हमें अभी तक नहीं दी गयी। हमने 112 और 1076 पर कम्पलेन भी लिखवायी थी और उसपर कोई भी कदम नहीं उठाया गया हैै। अस्पताल के समस्त डाक्टरों, कर्मचारियों, कन्ट्रोल रूम के कर्मचारी एवं इन्टीगरल हास्पिटल के एडमिनिस्टेªशन पर सख्त कार्यवाही की जाये ताकि अन्य किसी मरीज के साथ ऐसी घोर लापरवाही उक्त अस्पताल द्वारा भविष्य में की जा सके। पीड़ित ने इस सम्बंध में कई उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है।

इस सम्बंध मंे जब मृतक के लड़के आयुष श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि करोना के नाम डाक्टर व जिम्मेदार लूट खसोट मचाएँ हुए, डाक्टर इस वक्त पैसों के लालच में मृतक का कीमती समान तक गायब कर रहे हैं।
अब देखना यह है कि क्या इसी तरह कोरोना के नाम लूट खसोट चलती रहेगी या दिन दूना रात चैगनी रफ्तार से कोविड सेन्टर में मरीजों की जिन्दगी से खिलवाड़ करके डाक्टर रूपया कमाते रहेंगे।

मोहिनी शर्मा, एडवोकेट
सम्पादक-एसएम न्यूज 24 टाइम्स

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