खुदा ने मौत को सबका मुक़द्दर बना दिया , मौत फनां (मिट जाने ) का नाम  नहीं मुंतकिल (ट्रांसफ़र) होने का नाम है – मौलाना सै0 फ़ैज़ अब्बास मशहदी

नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

हर वो अमल इबादत है जो अल्लाह की रिज़ा के लिए किया जाए

इबादत से इन्सान तक़वे तक पहुच्ता है,तक़वा खुदा तक पहुचाने का  ज़रीया है

बाराबंकी ।खुदा ने मौत को सबका मुक़द्दर बना दिया , मौत फनां (मिट जाने ) का नाम  नहीं मुंतकिल (ट्रांसफ़र) होने का नाम है । यह बात मौलाना सै0 फ़ैज़ अब्बास मशहदी ने मौलाना गुलाम अस्करी हाल में मजलिसे तरहीम बराए ईसाल ए सवाब मरहूम सै0हुसैन अब्बास आबिदी इब्ने सै0 शफ्क़त हुसैन को खिताब करते हुए कहा ।उन्होने यह भी कहा कि हर वो अमल इबादत है जो अल्लाह की रिज़ा के लिए किया जाए । इबादत से इन्सान तक़वे तक पहुचता है,तक़वा खुदा तक पहुचाने का ज़रीया है । मौत से वो लोग घबराते हैं,जिनके पास सामाने सफर नही होता । मौत उस पुल का नाम है जो एक मंज़िल से दूसरी मंज़िल तक पहुचा दे। मौत से घबराना  नहीं चाहिये,बल्कि इसका इस्तक़बाल  करना चाहिए नाहक़ से दूरी बनाकर और हक़ को अपनाकर ।मौलाना ने ये भी कहा कि फ़ितरत अल्लाह की तरफ़ से अता होती है ।इंसानो को अल्लाह ने फ़ितरत अताकर सबसे अफ़जल  बनाया। मजलिस के आख़िर में करबला वालों के मसायब पेश किए ।जिसे सुनकर अज़ादार रोने लगे। मजलिस का आग़ाज तिलावत ए कलाम ए पाक से मौलाना अली मेहदी ने किया और पढ़ा – कौन कहता है मुझे शाने सिकंदर दे दे,मेरे माबूद मुझे फक्रे अबूज़र दे दे । निज़ामत के फराएज़ अजमल किन्तूरी ने अंजाम दिये । मजलिस से पहले डा 0रज़ा मौरान्वी ने अपना बेहतरीन  कलाम पेश किया-ये आंखे जाबजा नापाक मन्ज़र से गुज़रती हैं,इन्हें अश्के गमें शब्बीर से नहलाना पड़ता है ।उर्फी लखनवी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश किया – हंसी लबों पा मगर गूंज आसमान में है, हवा में भी है वही तीर जो कमान में है ।कुमैल रिजवी इलाहाबादी ने बेहतरीन कलाम पेश किया – न तो फुरकत  न तो तन्हाई  लिखी जाती है,अली की अन्जुमन आराई लिखी जाती है। अजमल किन्तूरी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश किया – सुखन के अर्श का सूरज तुलू कैसे करें,बताओ मिदहते हैदर शुरू कैसे करें ।डा 0 मुहिब रिज़वी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुये पढ़ा- मकीने अर्श की नुसरत के मोजज़े  को सालाम,मेरे क़दम तले दरिया ज़मीन  हो गया है ।आरिज़ जरगांवीं ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा-एक ईसा जो दूर तक पहुंचे ,और मूसा भी तूर तक पहुंचे , ये शरफ मुस्तफ़ा को हासिल है, जो खुदा के हुजूर तक पहुंचे ।इनायत अमान नक़वी ने पढ़ा – कभी मैं टूट के रोया नहीं ज़माने में,शहे जमां मेरा पुरसाने हाल रहता है ।हाजी सरवर अली कर्बलाई ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा – रिज़ाए शह के लिये जिन्दगी गुजार दे जो,वफ़ा ओ हक़ का वही ताजदार होता है । बानिये मजलिस डा 0रज़ा मौरान्वी व शुजा हुसैन रिज़वी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

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