इंसानियत को पैदा करने वाली खेती को औरत कहते हैं – मौलाना इफ्तेखार  मेहंदी

नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

जो इंसान इंसानियत के फर्ज अदा नहीं करता वह जानवर से बदतर है

बाराबंकी ।इंसानियत को पैदा करने वाली खेती को औरत कहते हैं । यह बात मौलाना गुलाम अस्करी हाल में इफ्तिखार अली रिजवी इब्ने मुमताज अली की बरसी की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना इफ्तिखार मेहंदी ने कही । उन्होने ये भी कहा नेक औलाद सदका ए जारिया है ।  औलाद अगर साहिबे किरदार है तो समझ लो कि यह उसके बाप की मेहनत का नतीजा है। मौलाना ने आगे कहा। कुरआन वो नूर है जिसका भेजने वाला नूर लाने वाला नूर जिस पर उतरा वह भी नूर है । मजलिस के आखिर में कर्बला वालों व रसूल की बेटी के दर्दनाक मसाएब पेश किए जिसे सुनकर मोमिनीन रो पड़े। मज लिस से पहले  ।अजमल किन्तूरी ने अपना कलाम्पेश करते हुये पढ़ा – रोज ए महशर नाम हो अजमल का मद्दाहे हुसैन , तब मैं समझूंगा के मेरी शायरी काम आ गई । आरिज़ जर्गान्वीं ने अपना कलाम पढ़ा- कश्तिये आल पर जो बहरे सफर जाते हैं , साहिल ए चश्मा ए जहरा पे उतर जाते हैं । डा0 मुहिब रिज़वी ने अपने अलग अन्दाज़ में कलाम पेश करते हुये पढ़ा – फिर शरीयत के लिए नैज़े पे सर रखेगा कौन  , रात के सीने पर देखेंगे शहर रखेगा कौन। मजलिस का आगाज जईम क़ाज़्मी  ने तिलावते कलामे इलाही से किया और नज़रानये अक़ीदत भी पेश किया अद्नान ने भी नज़रानये अक़ीदत पेश किया। इसके अलावा बच्चों ने भी नज़रानये अक़ीदत पेश किया ।बानिये मजलिस ने  सभी का शुक्रिया अदा किया ।नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

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