मित्र पुलिस का दायित्व निर्वहन कर रहे असहायों के खिदमतगार दीनानाथ

आलीमा शमीम अंसारी एसएम न्यूज24टाइम्स 9889609714

बाराबंकी। जो हमेशा से गरीबो को न्याय व महिलाओं को इज्जत देता हो वो व्यक्ति भला किसी महिला से गैर जिम्मेदाराना बात किस तरह कर सकता है। जो व्यक्ति खुद पीड़ित महिलाओ को न्याय देने के लिए अपनी कुर्सी कुर्बान कर सकता है। वह व्यक्ति भला पीड़ित महिला से किस तरह बत्तमीजी कर सकता है। हम बात कर रहे है वर्तमान में मोहनलाल गंज कोतवाली के इंचार्ज दीनानाथ मिश्रा की जिन्हें लोग देवता का भी दर्जा देने से नही चूकते है। इसलिए की वह पुलिस की वर्दी में वाकई देवता है।उनके द्वारा दिए गए न्याय के लोग गवाह है। एक एक बात की रामनगर कस्बे के लोग गवाही देने को तैयार है।ये वही कोतवाल है ,जिन्हें लोधेश्वर महादेवा आने वाले कांवरिये नारा लगाकर कहते थे। ऊपर भोलेनाथ नीछे दीनानाथ,कोई कैसे मान सकता है कि वह व्यक्ति किसी महिला को गाना सुना सकता है। 2012 में अपनी रामनगर तैनाती के दौरान दिसंबर महीने की कड़कड़ाती सर्दी में जिसमें की लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे थे।गस्त के दौरान केसरीपुर वार्ड में रात के 12 बजे प्रसव पीड़ा से तड़फ रही है महिला कि जब आवाज सुनी तो उनसे रहा नहीं गया ।उस महिला को अपने सरकारी जीप में बैठाकर बाराबंकी जिला अस्पताल पहुंचाया था। उस महिला के परिवारी जनों को न कोई एम्बुलेंस मिल रही थी और न ही कोई साधन। अपने 38 महीने की तैनाती कार्यकाल में उन्होंने पता नहीं कितनी दूसरे प्रांतों में भागी लड़कियों को सकुशल बरामद कर उनके परिवारी जनों के पास पहुंचाया था। जिससे उन्हें लोगों द्वारा सम्मानित भी किया गया था।एक दिन वह स्वयं रामनगर थाने पर बैठे थे एक 70 साल की बुजुर्ग महिला आई और उन्हें कुछ पैसे देकर एक प्रार्थना पत्र देने लगी जब उन्होंने पूछा माता जी यह क्या है,तब उस बुजुर्ग महिला ने जवाब दिया लोग कहते हैं कि पुलिस बगैर पैसे के कार्य नहीं करती है। इसलिए मैं आपको पैसे दे रही हु। जब कोतवाल साहब ने वह पोटली खोली उसमें 240 रुपए थे। उन्होंने जब वह पैसा बुजुर्ग महिला को वापस देना चाहा तो उस महिला ने कहा साहब सुना है कि पुलिस बगैर पैसे की काम नहीं करती इसलिए मैं पैसे लेकर आई हूं। महिला की हालत देख कर लग रहा था बहुत ही गरीब घर की थी। दीनानाथ मिश्र ने तुरंत फोर्स भेज कर महिला के विपक्षियों को बुलवा कर उस बुढ़िया महिला को न्याय दिलवाया और बदले में अपने पास से कपड़े व पैसे देकर उसे अपने साधन से घर भिजवाया। उनके रामनगर तैनाती के दौरान थाने पर उनकी मौजूदगी ना होने पर अगर कोई महिला आ गई और बैठी रही तो आकर तुरंत उझसे पूछते थे कि आप क्यों आई हैं और कैसे बैठी है अगर उस महिला ने बता दिया कि साहब मैं 1 घंटे से बैठी तो तुरंत अपने मातहतों को डांट कर उस महिला को तुरंत न्याय देते थे। माहतहो को उनका सख्त निर्देश था किसी भी पीड़ित महिला को थाने पर 10 मिनट भी ना रोके उसके परिवारी जनों को बुला कर बात करें और उस महिला को तुरंत न्याय दें। चोर तो उनका नाम सुनकर है चोरी उगल देते थे। थाने के सामने केडी मोबाइल की दुकान थी उनके यहां 2 दिन पहले चोरी हो गई थी । दीनानाथ मिश्रा का रामनगर से दूसरी जगह ट्रांसफर हो गया था और किसी कार्य से रामनगर थाने आए और चोर ने यह जान लिया कि दीनानाथ आ गए हैं। उसने सारी चोरी कबूल दी। उनके नाम से अपराधी कांपते थे और गरीब आदमी उन्हें अपने मसीहा मानते थे। उन्होंने न्याय कभी बेचा नहीं। उसके लिए भले ही उनका नुकसान हुआ हो। लेकिन गरीबों व महिलाओं को उन्होंने न्याय जरूर दिया है। उनका कहना था भगवान से डरना चाहिए। गरीब लोगों को न्याय जरूर देना चाहिए। क्योंकि उनकी सिफारिश करने वाला कोई नहीं होता है। उनका कार्य करने का तरीका सबसे अलग था।उनके न्याय देने के चर्चे इतने लोकप्रिय हैं कि सुनते सुनते लोग थक जायेगे।लिखते लिखते अखबार भर जाएगा लेकिन चर्चे कम नही पड़ेंगे। दीनानाथ मिश्रा जहां जहां जिन जिन थानों रहे हैं। उनके तबादले के बाद आम जनता उनके लिए रोती थी।उन्हें विदा करने के लिए थाना घेर लेते थे।और जब तक हो दूसरी जगह चले नहीं जाते तब तक लोग मौजूद रहते थे। हां यह जरूर है कि वह नेताओं का कहना नहीं मानते हैं वही उन पर भारी पड़ जाता है इससे पहले भी एक किसान यूनियन के छुट भैया नेता ने एक महिला से प्रार्थना पत्र दिलवा कर उनके ऊपर बदतमीजी करने का आरोप लगाया था। लेकिन जांच में वह बेकसूर निकले और आखिर मे उस महिला ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी कहा मैंने नेताजी के कहने पर आप खिलाफ प्रार्थना पत्र दिया था। यह नहीं दूसरा मामला मोहम्मदपुर खाला में था। जहां ऊपर के दबाव के बावजूद भी उन्होंने एक प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई नहीं की थी, और आखिरकार एसपी ने उन्हें थानाध्यक्ष पद से हटाया था। जब यह बात जनता को पता चली तो जनता ने पूरा थाना घेर लिया और जिंदाबाद मुर्दाबाद करने लगे।आखिरकार जांच में वहां भी दीनानाथ मिश्रा स्वच्छ छवि के पाए गए और रातों-रात ने इनाम के तौर पर रामनगर थाना दिया गया।हालांकि उन्हें पुनः मोहम्मदपुर खाला किया गया था लेकिन वह जाने से इंकार कर गए थे।इसलिए उन्हें इनाम स्वरूप रामनगर थाना दिया गया था। रामनगर थाने में तो उन्होंने अपनी कार्यशैली से लोगों का खूब मन जीत लिया था। 38 महीने बाद उनका यहां से ट्रांसफर हुआ तो लोग भावुक होकर उनसे मिलने के लिए थाने पहुंचने लगे। लेकिन वह चुपचाप अपनी गाड़ी से निकल गए। रामनगर से जाते हैं उन्हें गैर जनपद जाना पड़ा और दूसरे दिन ही सुल्तानपुर जनपद के लंभुआ थाने का चार्ज मिलेगा मिल गया। इसके बाद कुड़वार, कूड़े भार समेत सुल्तानपुर जनपद के समस्त थानों के इंचार्ज रहे। सुल्तानपुर से इनका ट्रांसफर लखनऊ जोन के हरदोई में हो गया हरदोई में भी जनता ने उनको सर आंखों पर बिठाया और वहां उन्होंने लगभग जिले के सभी थानों पर इंचार्ज जी की और जब वहाँ से उनका ट्रांसफर पुनः लखनऊ हुआ तो उन्होंने अपने अच्छी कार्यशैली से ठाकुरगंज कैसरबाग थाने की बेदाग थानेदारी की एक मामले में जब उनका ट्रांसफर मोहनलालगंज हुआ तो उन्होंने उस केश को 1 सप्ताह में ही खोल दिया और अपराधियों को जेल भेजा। अच्छी कार्यशैली वाले थानेदार पर एक महिला जब किसी तरह का आरोप लगाती हैं।तो समझ से परे होता है। दीनानाथ मिश्रा ऐसे थाना इंचार्ज हैं जिनको गाना गाना तो छोड़ दीजिए गाना गाने वाले लोगों से भी नफरत है।तो वह भला उस महिला को गाना किस तरह सुनाएंगे। फिलहाल दीनानाथ मिश्रा जहां जहां भी रहे हैं। वहां वहां उन्होंने अपनी कार्यशैली से अधिकारियों जनप्रतिनिधियों व आम जनता का दिल जीता है।अगर उस महिला ने आरोप लगाया है।यह किस दबाव में यह किसके कहने पर लगाया है।यह जांच का विषय है।क्योंकि दीनानाथ मिश्रा को गलत काम कोई पसंद नहीं है चाहे वह महिला करें या पुरुष।आलीमा शमीम अंसारी एसएम न्यूज24टाइम्स 9889609714

 

 

 

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