आंगन का एक बूढ़ा शजर काटकर जनाब, आंगन में तेज धूप को न्योता दिया… शहंशाह-ए गजल खुमार की याद मे मुशायरे का हुआ आयोजन

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

बाराबंकी। नगर पालिका मार्केट स्थित खुमार एकेडमी हाल मे शहंशाह-ए गजल खुमार बाराबंकवी की याद में कारवाने इंसानियत मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता जियाउल हसन ने की। मुख्य अतिथि के रूप में शहाब एडवोकेट, अनस किदवई तथा ख्वाजा आरिफ उपस्थित रहे। मुशायरे का संचालन डॉक्टर रेहान अलवी बाराबंकवी ने किया। इस अवसर पर मुशायरे में एक से बढ़कर एक कलाम शायरों ने प्रस्तुत किए। जियाउल हसन ने खुमार बाराबंकवी की जिन्दगी पर रोशनी डालते हुवे कहा कि शहंशाह-ए गजल खुमार साहब ने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा चुके है और हिंदुस्तान का नाम शिखर की बुलन्दी तक पहुचाने का काम किया है। इसी कड़ी मे उस्मान मीनाई ने कहा-आंगन का एक बूढ़ा शजर काटकर जनाब, आंगन में तेज धूप को न्योता दिया गया,, इरफान बाराबंकवी ने पढ़ा-सिर्फ अपने हैं हमसे खफा, और कोई खफा ही नहीं, वकार बाराबंकवी ने कहा-सबकी आंखों में हो ना हो लेकिन, सबके दिल में खुमार आज भी हैं, उजैर रसौलवी ने कहा-वह मुझसे छुपके मिलती थी तो उस पर लगाए पहरे, काका साथ रहते हैं बुआ अब साथ चलती है,, फैज खुमार ने पड़ा-फिर फैज तुम को क्यों ना मुकद्दर पे नाज हो, मिलता है सिलसिला जो तुम्हारा खुमार से, रेहान बाराबंकवी ने कहा-हर बशर तुमको नजर आएगा खुद से बेहतर, अपने किरदार पे नजरें तो उठा कर देखो,, फैज आतिश ने कहा-पहले तो बोलता था परिंदा सितम पे खूब, लेकिन फिर उसके बाद उसे दाना मिल गया,, आदर्श बाराबंकवी ने कहा-हो हाथ उस पे जैसे कि परवरदिगार का, सानी नहीं है कोई भी हजरत खुमार का,, डॉक्टर फुरकान ने कहा कि-मुद्दत से तेरी दीद को बेजार बहुत हूं, अब चांद सा चेहरा यह दिखा क्यों नहीं देते,, जाहिद बाराबंकवी ने पढ़ा-संभल सको तो अभी वक्त है संभल जाओ, कि इस से पहले खुदा का अजाब आ जाए,, इनके अलावा डॉ फिदा हुसैन, शाद बड़ेलवी नफीस बाराबंकवी रेहान रौनकी आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर मेराज हैदर, मोहम्मद असगर उस्मानी, मोहम्मद उमैर, प्रदीप सारंग, फरीदुल हसन, सदानंद वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता जिमी आदि उपस्थित थे।

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