महंगी रसोई गैस के कारण मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने को गरीब हुए मजबूर

पाली (हरदोई)। शासन द्वारा गरीब परिवारों को उज्जवला योजना के माध्यम से दिए गए गैस सिलेंडर महज उनके घरों की शोभा बनकर रहे गए है लगातार गैस की बढ़ रही कीमतों की वजह से यह लोग कई कई महीनों तक गैस की रिफिलिंग नहीं करवा पाते जिसकी वजह से उनके घरों की गृहणिया चूल्हा फूंकने के लिए मजबूर हो रही है

गौरतलब है कि वर्ष 2016 में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए सरकार द्वारा उज्जवला योजना शुरू की गई थी जिसके अंतर्गत निशुल्क गैस कनेक्शन की व्यवस्था दी गई थी लोगों ने बढ़-चढ़कर इस योजना का लाभ लिया जिसे कुछ हद तक प्रदूषण पर ब्रेक लगने के साथ ही गृहणियों को जहरीले धुएं से भी निजात मिल गई थी लेकिन उस समय रसोई गैस की कीमत 423 रुपये प्रति सिलेंडर होती हुआ करती थी लेकिन इस समय लगातार बढ़ रही रसोई गैस की रुलाती कीमतों ने गरीबों के बजट का कचूमर निकाल कर रख दिया है मेहनत मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चलाने वाले गरीब परिवारों के लोग कई कई महीनों तक अब गैस सिलेंडर की रिफलिग नहीं करा पा रहे हैं जिसकी वजह से उनके घरों की गृहणिया परंपरागत ढंग से गोवर के उपले और लकड़ियों से अपनी रसोई में जहरीले धूए के बीच खाना बनाने के लिए मजबूर हो रही है इलाके के अतर्जी गाँव निवासी सुमन देवी, पाली नगर निवासी माथुरी , व भगवंतपुर गाँव निवासी सुनीता देवी आदि गृहणियों का कहना है कि सरकार की उज्ज्वला योजना के तहत हम लोगों को नि: शुल्क घरेलू गैस कनेक्शन तो मुहैया हो गए लेकिन आसमान छू रही घरेलू गैस के दामों ने पूरे घर का बजट बिगाड़ कर रख दिया है जिसके कारण हम लोग गोबर के उपले व लकड़ी से खाना बनाने के लिए मजबूर हो रही हूं

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