वा हुसैना वा मजलूमा की गूंजी सदाएं
इस्लाम बे इंसाफी का मज़हब नहीं – मौलाना नक़ी अस्करी
इस्लाम दौलत परस्ती की मज़म्मत करता है दौलतमंदी की नहीं-मौलाना तस्नीम हैदर
अजाखाना ए अबूतालिब ही फ़र्शे अज़ा है , फ़र्शे अज़ा ही वो मदरसये अबू तालिब है जहां से इंसान को जीने का सलीका मिलता है -अली अब्बास
इत्तेहाद इल्म और सब्र का दामन मजबूती से थाम ले।यहां ईगो अनानियत कोई अहमियत की नहीं ।
बाराबंकी । इस्लाम में जिसका जितना हक है उसे उतना ही दिया जाता है ।इस्लाम बे इंसाफी का मज़हब नहीं ।
दुनियां में औरतों को सबसे पहले हक़ दिलाने का और उसकी हिफ़ाज़त का काम इस्लाम ने किया। यह बात इमाम बाड़ा मौलाना गुलाम अस्करी हाल में मजलिस को खि़ताब करते हुए आली जनाब मौलाना नक़ी अस्करी ने कही ।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्बला हमें ज़िंदगी जीने का सलीका सिखाती है , इत्तेहाद ,सब्र और दीन का अस्ल मरकज़ है करबला । हुसैन अ ने जालिमों ( आतंकवादियों) को करबला में बे नक़ाब कर दिया।जान लो जो भी पहला वार करे उसका इस्लाम से कोई सरोकार नहीं ।
आखिर में करबला वालों के दर्दनाक मसायब पेश किया।जिसे सुनकर सभी रोने लगे।आगा़ज़ तिलावत से हुआ। इमामबाड़ा मीर मासूम अली कटरा में अशरे की नवीं मजलिस को अपने खुसूसी अन्दाज़ में खि़ताब करते हुए आली जनाब मौलाना जाबिर जौरासी ने कहा बूढ़े बाप ने बरछी का फल क्या निकाला कलेजा निकल पड़ा । ये सुनते ही सभी रोने लगे। मजलिस का आग़ाज़ तिलावते कलामे इलाही से हुआ । शोअराओं ने नज़रानये अक़ीदत पेश की । इसके बाद आगा़ फ़य्याज़ मियां जानी के अजाखाने में अली अब्बास ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा अजाखाना ए अबूतालिब ही फ़र्शे अज़ा है , फ़र्शे अज़ा ही वो मदरसये अबू तालिब है जहां से इंसान को जीने का सलीका मिलता है। इत्तेहाद इल्म और सब्र का दामन मजबूती से थाम ले।यहां ईगो अनानियत कोई अहमियत की नहीं ।
आखिर में करबला वालों के मसायब पेश किए । अन्जुमन इमामिया कटरा ने नौहाख्वानी की । मोहसिन साहब के अजाखाने में मौलाना तसलीम हैदर साहब ने मजलिस को खि़ताब करते हुए कहा कि इस्लाम दौलत परस्ती की मज़म्मत करता है दौलत मंदी की नहीं । दौलत मंद दूसरों का ख़याल रखते हैं
दौलत परस्त सिर्फ़ अपना खयाल रखते हैं । खुदा के फैसले पर हमें अमल करना है नतीजा देना खुदा का काम है । सुबह से मजलिसों का सिलसिला अस्करी हाल से शुरू होकर बेलहरा हाउस, लाइन पुरवा ,कम्पनी बाग़,नेहरु नगर कर्बला , अली कलोनी दयानंद नगर, लखपेड़ाबाग, बेगमगंज, दशहरा बाग ,पीर बटावन , तकिया ,सट्टीबाजार आदि मोहल्लों में मजलिस का सिलसिला जारी रहा ।मरहूम अतहर हुसैन एडवोकेट के अजा़खाने में मजलिस को मौ०मो०रज़ा ज़ैदपुरी ने खि़ताब करते हुए कहा बेशक़ हुसैन हिदायत का चराग हैं और सफ़ीनये नजात हैं।मौलाना ने कहा ये अय्याम के दिन खूंन के आंसूरूलाने वाले हैं ।ऐसे कोई काम न करें जो इमामे ज़माना को नागवार गुज़रे। खुली सड़कों पर अलम लेकर चलना और मातम के साथ बयान करना ऐलाने फतह ए हुसैनी की दलील है ।यज़ीदी फ़िक्र को इससे तकलीफ़ होती है । आखिर में करबला वालों के मसायब पेश किया।जिसे सुनकर सभी रोने लगे। हर तरफ़ या हुसैन या हुसैन की सदाएं गूजती रही। वहीं गाँवों व कस्बों में भी घर घर गूंजी या हुसैन या हुसैन की सदाएं ।रातभर मजलिस व मातम का चलता रहा सिलसिला ।कल दफ़्न हो जाऐंगे ताज़िये सूने हो जायेंगे अज़ाख़ाने ।

