प्रदूषण पर नियंत्रण को अब लगेंगे PNG से चलने वाले ईंट-भट्ठे, पुराने होंगे बंद
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दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है. हर साल ही अक्टूबर महीने के बाद एनसीआर की हवा में प्रदूषण का जहर घुल जाता है. जिसके लिए अभी तक पराली जलाने से लेकर सड़कों पर दौड़ते वाहनों से निकलने वाला धुआं भी जिम्मेदार रहा है. हालांकि अब वायु प्रदूषण को बढ़ाने में ईंट-भट्ठों की भागीदारी को देखते हुए परंपरागत ईंट भट्टा उद्योग को बंद करने के साथ ही नई तकनीक को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी की जा रही है.
दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर प्रदेश में अब कोयला से चलने वाले ईंट-भट्ठों के बजाय पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस से चलने वाले ईंट भट्ठे लगाने के सुझाव दिए गए हैं. हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के प्रमुख जस्टिस एके गोयल की अगुआई वाली पीठ की ओर से कहा गया कि ईंट भट्ठा उद्योगों का दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा में सर्दियों और गर्मियों के दौरान पीएम-10 उत्सर्जन में लगभग 5 से 7 फीसदी का योगदान रहता है. लिहाजा प्रदूषण फैलाने वाले ईंट भट्टों की जगह अब पीएनजी से चलाए जाने वाले नए भट्टे लगाए जाएं.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश सरकार को दिए गए निर्देशों के संबंध में सीपीसीबी के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि एनजीटी काफी पहले से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे अवैध ईंट-भट्टों को लेकर सख्त रहा है. पिछले साल भी प्रदूषण फैलाने वाले अवैध ईंट-भट्टों को बंद करने के निर्देश दिए गए थे. साथ ही बाकी भट्टों पर निगरानी रखने के साथ ही समय-समय पर उनकी जांच करने के लिए भी कहा था.
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