हक़ वाले इमाम के हुक्म की पैरवी करते हैं : मौलाना अब्बास मशहदी
नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211
बाराबंकी। जो रहमो करम अल्लाह के यहां पाया जाता है वही रहमों करम आइम्मा ए मासूमीन के यहाँ भी पाया जाता है। अल्लाह किसी भी कौम में तब्दीली नहीं करता, जब तक उसके तमाम अफ़राद ख़ुद बदलने की कोशिश नहीं करते। करबला में हुसैन ने दीन के साथ इंसानियत को भी बचाया। अब ये इंसान के ज़र्फ़ की बात है कि वो हिदायत हासिल कर हुर अलहिस्सलाम बन जाए या हिदायत से दूर होकर उमरेसाद लानतुल्लाह बन जाए। यह बात मौलाना गुलाम अस्करी हाल में जनाब अहमद रज़ा द्वारा आयोजित अशरे की आठवीं मजलिस को खि़ताब करते हुए आली जनाब मौलाना फ़ैज़ अब्बास मशहदी साहब क़िबला ने कही। मौलाना ने ये भी कहा कि अल्लाह का फ़ैज़ हर इंसान को उसकी ज़र्फि़यत के ऐतबार से मिलता है। अपने वुजूद में पल रहे उमरेसाद को ख़त्म करें हुर का किरदार पैदा करें। जिसका वली शैतान होता है उसे अच्छाई से बुराई की तरफ़ ले जाता है। हक़ के मतवाले इमाम के हुक्म की पैरवी करते हैं, दौलत व हुकूमत की परवाह नहीं करते। आखिर में करबला वालों के मसायब पेश किए जिसे सुनकर सभी रोने लगे। मजलिस से पूर्व हाजी सरवर अली कर्बलाई ने पढ़ा-जिसने वजूद अपना हुसैनी बना लिया, समझो हुसैन का वही सच्चा ग़ुलाम है। फ़राज़ ज़ैदी ने पढ़ा -तारीख़ ने दरिया का कनारा नहीं लिक्खा, मैंदान का हर एक नज़ारा नहीं लिक्खा। मजलिस का आग़ाज़ तिलावत ए कलाम ए इलाही से मो. हसन जै़दी ने किया। अन्जुमन ग़ुन्चये अब्बासिया ने नौहा खानी व सीनाज़नी की।
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