सर सैयद अहमद खां ने शिक्षा की लौ से समाज के भविष्य को रोशन करने में अहम योगदान किया
बाराबंकी: रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500
सर सैयद अहमद खां ने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए कई अहम काम किए वर्तमान समय में सर सैयद जैसे कई सुधारकों की जरूरत है – डॉ0 एस. एम. हैदर
बाराबंकी । 17 अक्टूबर। सर सैयद अहमद खां ने शिक्षा की लौ से समाज के भविष्य को रोशन करने में अहम योगदान किया। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए भी कई अहम काम किए और वर्तमान समय में सर सैयद जैसे कई सुधारकों की जरूरत है।
महान सुधारक और शिक्षाविद सर सैयद अहमद खां की 204वीं जयंती पर राब्ता सेवा संस्थान द्वारा आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने यह बात कही। ‘सर सैयद का नजरिया इंसानियत’ विषयक इस सेमिनार के मुख्य अतिथि पूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एस. एम. हैदर ने कहा कि सर सैयद अहमद खां ने दुनिया और आखिरत में कामयाबी के लिए खासकर मुस्लिम कौम की दीनी तालीम के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सर सैयद हिंदू-मुस्लिम एकता के मजबूत पैरोकार थे और उन्होंने इसकी हिफाजत के लिए भी कई अहम काम किए थे। सर सैयद हिंदू और मुसलमान को शरीर की दो आंखों की तरह मानते थे।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर ए. एच. उस्मानी ने कहा कि राजनीतिक अधिकारों को हासिल करने और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठकर हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए खुले दिल और दिमाग से काम करने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि सर सैयद ने मुस्लिम कौम के बीच शिक्षा को लेकर एक क्रांति पैदा की उनके द्वारा स्थापित किया गया एंग्लो इंडियन कॉलेज बाद में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम से मशहूर हुआ। इस विश्वविद्यालय ने हिंदुस्तान को राजनीति, शिक्षा, विज्ञान, साहित्य और चिकित्सा समेत तमाम क्षेत्रों में अविस्मरणीय योगदान करने वाली अनेक नामचीन हस्तियां दी हैं। आज के समय में ऐसे ही कई सर सैयद की जरूरत है।
सेमिनार का संचालन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री मोहम्मद सलीम ने कहा कि वर्तमान में मुसलमानों को मायूसी और बेबसी से ऊपर उठकर दूरदर्शिता का प्रदर्शन करना चाहिए और स्वयंभू सांप्रदायिक शक्तियों को नाकाम बनाना चाहिए। इसके लिए समाज में शिक्षा की नई लौ जलाने की जरूरत है। ठीक वैसे ही जैसे सर सैयद ने किया था। सेमिनार में शिरकत करने वालों का श्री फरहत अली ने शुक्रिया अदा किया।इस मौके पर डॉक्टर गुफरान कासमी, जीनत अफरोज, मास्टर माजिद अंसारी और मोहम्मद मुदस्सिर सलीम ने भी अपने-अपने विचार रखे।बाराबंकी: रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500
Related Posts

