सपा के गढ़ में मुस्लिमों का रूझान बसपा प्रत्याशी की ओर

.............अब्दुल मुईद के सुहैल अहमद अंसारी की खास रिपोर्ट

आपसी खींचातानी के कारण समाजवादी का किला ढहने की कगार पर

बाराबंकी। मौजूदा समीकरण में बाराबंकी सदर विधान सभा में मुस्लिम वोट प्रतिशत चल रहे राजनैतिक उथल-पुथल में ज्यादातर मुस्लिम मतदाता सपा छोड़कर बसपा प्रत्याशी की ओर कदम से कदम बढ़ा रहे हैं। बसपा प्रत्याशी डॉ0 विवेक सिंह वर्मा के चुनाव मैदान में आने के बाद से पुराने धुंरधरों की नींद हराम हो गई है। कई पार्टियों को तो टक्कर वाला प्रत्याशी ही नहीं मिल रहा है। आगामी विधान सभा चुनाव में परिवर्तन के लिए मतदाताआंे में काफी उत्साह नजर आ रहा है। वहीं समाजवादी पार्टी में टिकट को लेकर अन्दरूनी कलाह चालू है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सदर विधान सभा का चुनाव दिन प्रतिदिन रोचक होता जा रहा है, लगातार मिल रहे जन समर्थन से कई घाघ नेताओं की नींद बसपा प्रत्याशी ने उड़ा दी है। बाराबंकी सदर सीट का जातीय समीकरण अन्य विधानसभा सीटों के मुकाबले कहीं अलग और खास है। इसी समीकरण का नतीजा है कि भाजपा कभी यहां खाता खोल नही पाई है। यहा मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करता आया और आगे भी करेगा, लेकिन इस बार डा0 विवेक सिंह वर्मा बेहतर प्रत्याशी के रूप में मुस्लिमों में खासी पैठ बनाएं हुए हैं। सदर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण ही यहां पर चुनाव लड़ने आए प्रत्याशी की हार जीत का निर्णय करता है। दल चाहे जो हो उम्मीदवार चाहे जितना दमदार हो पर मतदान के वक््त जातीय समीकरण हमेशा से हावी और प्रभावी होता आया है। इसी की बदौलत समाजवादी गढ़ लम्बे समय तक अजेय रहा, ऐसा नही कि बसपा कही पीछे रही पर उसका प्रत्याशी चयन का पैमाना इस पर सर्वश्रेष्ठ रहा है। रही बात भाजपा की तो सारी ताक़त लगाने के बाद प्रत्याशी जीत की दहलीज तक नहीं पहुंच पाया। समाजवादी गढ़ अब बसपा मय होने को बरकरार है क्योंकि वर्मा मतो के पीछे मुस्लिम, दलित व अन्य समुदाय मजबूती से खड़ा रहा। यही समीकरण बसपा प्रत्याशी को विजय की ओर अग्रसर कर रहा है। बसपा उम्मीदवार की प्रतिष्ठा नेत्र चिकित्सालय के चलते क्षेत्र के साथ साथ कई जनपदों में हैं। जहां विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार दौड़भाग कर अस्वस्थ हो जाते हैं, वही डॉ विवेक सिंह वर्मा की दिनचर्या दिन प्रतिदिन तीव्र होती जा रही है।

सामाजिक छवि का मिल रहा है लाभ

मालूम हो कि अन्य दलों के कई उम्मीदवारों पर दर्जनों मुकदमें दर्ज हैं। कई नेता तो अपने परिवार को बढ़ाने में पूरे परिवार कहीं न कहीं से निर्वाचित करवा चुके हैं, जिससे क्षेत्र में अन्य कार्यकर्ताओं में काफी रोष हैं, किन्तु बसपा प्रत्याशी की स्वस्छ छवि के चलते इनके मतों का प्रतिशत लगातार बढ़ता ही जा रहा है।………….अब्दुल मुईद के सुहैल अहमद अंसारी की खास रिपोर्ट

 

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