संस्कारों की वैचारिक क्रांति का पर्याय है सत्संग : लालता दास
एसएम न्यूज़24टाइम्स जिला ब्यूरो के साथ मोहम्मद अतीक की रिपोर्ट थाना क्षेत्र असंद्रा 787049566
ब्रह्मलीन बाबा प्रेमदास की कुटी पर आयोजित मानस सम्मेलन का दूसरा दिन
हैदरगढ़ बाराबंकी। संतों का सत्संग व्यक्ति में संस्कारों का वैचारिक प्रवाह बढ़ाता है स्पष्ट है कि श्रीरामचरितमानस का प्रत्येक शब्द अथवा अक्षर संस्कार एवं मर्यादा की शिक्षा देता है ऐसे में सत्संग संस्कारों की वैचारिक क्रांति के पर्याय हैं उक्त बात महंत 108 श्री बाबा लाल दास जी महाराज ने आज ब्रह्मलीन बाबा प्रेमदास जी की कुटिया पर आयोजित श्री रामचरित मानस सम्मेलन के दूसरे दिन कहीं। बाबा लालता दास जी ने मानस सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के द्वारा प्रस्तुत आदर्शों को अपने जीवन में उतारे उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस ऐसा ग्रंथ है जिसके सानिध्य होकर हम अपने जीवन को संस्कारों की बहुमूल्य संपदा से फलीभूत कर सकते हैं लालता दास जी ने कहा कि आज संत समाज पर भी जिम्मेदारी है कि वह सनातन धर्म यूको संस्कारों से सिंचित करें यह तभी हो पाएगा जब स्वयं भी संत समाज संस्कारों से विलग ना हो लालता दास जी ने कहा कि हिंदू हिंदुत्व को बलवान बनाने के लिए जरूरी है कि हम सभी अपने रिसीव मुनियों एवं महापुरुषों के द्वारा स्थापित किए गए मर्यादित संस्कारों का अनुसरण करें। लालता दास जी ने कहा कि आज हम सत्संग में जाते हैं रामलीला देखते हैं तीर्थाटन करते हैं लेकिन फिर भी हमें लोग एवं लाभ का चिंतन छोड़ नहीं पाता उन्होंने कहा आवश्यकता इस बात की है कि सभी सम्मानित संत जन एवं सम्मानित गणमान्य लोग हिंदू समाज में संस्कारों की कमजोर पड़ती शक्ति को मजबूती प्रदान करें। कथा में प्रमुख रूप से मानस मर्मज्ञ अजय शास्त्री, अखिलेष्वरानंद महाराज, बाबा सालिगराम, पन्नालाल, हरिओम तिवारी, पंडित अभय नाथ त्रिपाठी, पंडित भगवती प्रसाद,पहलवान बाबा, सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण कुमार द्विवेदी राजू भैया, अधिवक्ता कमलेश बख्स सिंह सहित सैकड़ों श्रोताजन उपस्थित थे।
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