बीजेपी छोड़कर जाने वाले दिख रहे परेशान
अब्दुल मुईद सिटी-अपराध ब्यूरो। (एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स) 9936900677
सरकार बनने के बाद आना और चुनाव से पहले भाग जाना ऐ-साहब यह ठीक नहीं!
बाराबंकी। सत्ता में रहना कई बड़े-बड़े नेताओं का शगल बन गया है वहीं कई नेताओं ने अपना व्यापार व आकूत सम्पत्ति को बचाने के लिए गलत निर्णय लेते हुए समाजवादी पार्टी में शामिल हो गये थे, उनको अंदेशा था कि पांच साल सत्ता की मलाई काटी जायेगी, लेकिन परिणाम आने के बाद कई नेताओं की धुध-धुकी बढ़ गई है, वहीं जनता कह रही है कि अब तेरा क्या होगा दलबदलुओं। कई सत्ता के लोभी भाजपा में आने के लिए लगाने लगे हैं जुगाड़। पांच साल मलाई काटी और आचार संहिता लागू होने के बाद पहुंच गये थे समाजवादी पार्टी में। मौजूदा समय में सियासी दलबदलुओं से परेशान नजर आ रहा है गिरगिट? फ़िलहाल नेताओं के बने हैं खास! इन दलबदलुओं का मुख्य हथियार है दलबदलना। अब सवाल यह पैदा हो रहा है कि चुनाव से पूर्व पाला बदलने वाले नेता अब क्या करेंगे पांच साल!
बाराबंकी में विधानसभा चुनाव का जोर व शोर अब शांत हो गया है। ऐसे में विभिन्न दलों के समर्पित कार्यकर्ता अपने-अपने प्रत्याशी के प्रचार-प्रसार में पूरी ताकत झोंक कर विजयश्री दिलवा चुके हैं, लेकिन चुनाव अभियान में एक ऐसी भी जमात सक्रिय रही थी जिसने अपने भविष्य व्यापार के फायदे के लिए सदैव दलीय प्रतिबद्धता के परखच्चे उड़ा दिए हैं! इन दलबदलुओं का उद्देश्य और लक्ष्य यही रहता है कि सरकार किसी की बने! विधायक कोई बने! भविष्य में उनका कोई काम ना रुके? अर्थात उनके स्वार्थों की पूर्ति होती रहे और व्यापार चलता रहे और आर्थिक रूप से मजबूती मिले। आज सियासी स्तर पर ऐसे दलबदलू चाल चरित्र चिंतन बदलने वाले दलबदलुओं से बेचारा गिरगिट भी कांप रहा है? शायद गिरगिट यही सोच रहा होगा कि उसके रंग बदलने की विद्या को इन दलबदलू रूपी नेताओं ने किसी लायक तक नही छोड़ा? दूसरी ओर विभिन्न दलों के समर्पित कार्यकर्ता इन दलबदलुओं की असलियत को जानते हुए भी इनका विरोध नहीं कर पाते! क्योंकि उन्हें पता है कि वह उनके अपने आका के खास हैं?
दलबदलू संत बने नजर आते हैं! चेहरे पर कोई संकोच नहीं! बातचीत में कोई रुकावट नहीं! बेबाक बोलते हैं फलाँने आका से मेरे व्यक्तिगत संबंध हैं? इसमें पार्टी की कहीं कोई बात ही नहीं है! हम पहले संबंध देखते हैं! पार्टी बाद में देखते हैं समझे? संबंधों के लिए ही हमारा प्रयास है कि फलाँने भैया को चुनाव जितवा दिया। दलबदलुओं के उपदेशों को सुनकर दल का असली समर्थक अथवा समर्पित कार्यकर्ता सन्न रह जाता है। दलबदलू संबंधों से आगे निकल जाते हैं? बोलते हैं! फलाँने मेरी जाति के हैं। मेरे धर्म के हैं। स्पष्ट है कि ऐसे सभी सियासी दलबदलुओं का मुख्य हथियार चापलूसी है!
मालूम हो कि जनपद में लगभग एक दर्जन से अधिक पुराने व घांघ नेता जो भाजपा में रहकर पांच साल मलाई काटी परिवर्तन की आहट को देखते हुए सपा में शामिल हुए थे किन्तु यहां पर उनका दबाव उलटा हो गया अब बेचारे पांच साल कहा रहेंगे, इसी बेचैनी में दिन रात गुजर रही है। सूत्रों से पता चला है कि कुछ नेता घर वापसी के लिए तरह-तरह के हथकण्डे अपना रहे हैं और गलती की माफी मांगकर पुनः पार्टी समर्पित बनना चाहते हैं।
अब्दुल मुईद सिटी-अपराध ब्यूरो। (एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स) 9936900677

