शाह और नड्डा ने चुने 10 मुद्दे, जिन पर बीजेपी लड़ रही दिल्ली चुनाव

नई दिल्ली। भाजपा दस प्रमुख मुद्दों पर दिल्ली का विधानसभा चुनाव लड़ती नजर आ रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा इन्हीं दस मुद्दों को सभाओं में प्रमुखता से उठा रहे हैं। इन मुद्दों में स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दे शामिल हैं। जानिए, वे कौन मुद्दे हैं जिन पर भाजपा चुनाव लड़ रही है।

नागरिकता कानून और शाहीन बाग

दिल्ली के रिठाला और जनकपुरी बाबरपुर में सोमवार को आयोजित जनसभा में अमित शाह ने इन मुद्दों को उठाया। इससे पहले भी अमित शाह और जेपी नड्डा की सभी सभाओं के भाषण पर गौर करें तो ये मुद्दे कॉमन रहे। चुनावी सभाओं में नागरिकता संशोधन कानून पर सबसे ज्यादा बात भाजपा नेता कर रहे। शाहीनबाग के आंदोलन को देश तोड़ने का ख्याल रखने वालों का आंदोलन भाजपा नेता बताने में जुटे हैं।
केजरीवाल सरकार की वादाखिलाफी भी बड़ा मुद्दा
अमित शाह, जेपी नड्डा सहित सभी भाजपा नेता सभाओं के जरिए केजरीवाल सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं। अमित शाह और जेपी नड्डा अपने हर भाषण में वादे के मुताबिक, दिल्ली में एक हजार स्कूलों का निर्माण न होना, वाई-फाई न लगना, यमुना का स्वच्छ न होना और नए अस्पतालों का निर्माण न होने को मुद्दा बना रहे।
370 और सर्जिकल स्ट्राइक
अमित शाह ने सोमवार को रिठाला की जनसभा में एक बार फिर अनुच्छेद 370 और सर्जिकल स्ट्राइक का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि चाहे 370 का खात्मा हो, आतंकियों पर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक हो राहुल गांधी और केजरीवाल एंड कंपनी ने पुरजोर विरोध किया।
1731 कॉलोनियों में रजिस्ट्री की शुरुआत
चुनाव की घोषणा होने से पहले से ही भाजपा 1731 अवैध कालोनियों को मुद्दा बना चुकी है। इन कालोनियों को अधिकृत कर रजिस्ट्री की सुविधा शुरू कराने को मोदी सरकार की उपलब्धि बताकर भाजपा केजरीवाल सरकार की घेराबंदी करने में जुटी है।
जहां झुग्गी वहीं मकान
झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को दो-दो कमरे का मकान देने का भाजपा वादा कर रही है। इसके लिए झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों का पार्टी कार्यकर्ता फॉर्म भी भरवा चुके हैं। अमित शाह और जेपी नड्डा जहां झुग्गी वहीं मकान का नारा हर सभा में लगा रहे।
आठ लाख नौकरियां : भाजपा ने इस चुनाव में आठ लाख नौकरियों को भी मुद्दा बनाया है। अमित शाह चुनावी सभाओं में कह रहे हैं कि केजरीवाल सरकार ने आठ लाख नौकरियां देने का वादा किया था, मगर युवाओं को नहीं मिलीं।

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