वीडियो वायरल होने के डर से, अब बदल गया है वसूली का तरीका
अब्दुल मुईद सिटी-रिपोर्टर (एस0एम0 न्यूज 24टाइम्स) 9936900677
कई विभागों में मोबाइल साहब तक पहुंचने से पहले करा लिये जाते हैं जमा, अब थर्ड परसन उचित माध्यम से पहुंचा रहे हैं पैसा
बाराबंकी। (एस0एम0 न्यूज24टाइम्स) जिले में कई विभागों के अधिकारियों की रिश्वत लेते हुए वीडियों जारी होने से अन्दर ही अन्दर सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों में खलबली मची हुई है, अब अधिकारियों ने अपने मातहतों को होशियार, खबरदार व जागरूक कर दिया है। ज्यादातर सरकारी मुलाजिम अब डायरेक्ट हाथों में पैसा न लेकर विभाग के प्राइवेट व्यक्तियों से रकम डकार रहे हैं, वह इसलिए की क्योंकि खुद को बचाया जा सके और उच्चाधिकारियों की नजरों से छिपकर भ्रष्टाचार को करके करोड़ों रूपये सही तरीके से हजम किये जा सके। सरकार द्वारा प्रचारित व प्रसारित किया जाता है कि घूसखोर अफसरों पर सरकार की पैनी नजर रहती है लेकिन वास्तव में भ्रष्टाचारी पात-पात नजर आते हैं। जहां अधिकारी कुछ साल पहले तक फरियादियों से रिश्वत की मांग सीधे तौर पर करते थे, वहीं अब वीडियो वायरल होने के डर से सीधे घूस मांगने में जोखिम भी बढ़ गया है। समय के साथ-साथ घूसखोर अधिकारी भी चौकन्ने हो गए। वीडियों के साथ-साथ आवाज रिकॉर्ड करने की नई-नई टेक्नोलॉजी ईजाद होने के बाद से रिश्वत मांगने और लेने के तरीके भी बदल लिए हैं। अब तो इशारों में रिश्वत मांगने का तरीका विकसित हो गया है। घूसखोर अफसर रिश्वत मांगने के तरीकों में कितने ही बदलाव क्यों न कर लें लेकिन वे शिकंजे में कभी-कभी आ ही जाते हैं। ज्यादातर सरकारी कर्मचारी और विभागों में कोड वर्ड का प्रयोग होता है जिसमें कुछ यह है कि चाय-पानी की व्यवस्था-यानी सरकारी कर्मचारियों वालों को खाली चाय-पानी देने से काम नहीं चलेगा। चाय-पानी के साथ कुछ कैश देने की डिमांड की जा रही है। अब सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेने में तकनीक का इस्तेमाल भी करने लगे हैं। रिश्वत लेने के खतरों को देखते हुए अब कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत की मांग बोलकर नहीं बल्कि मोबाइल पर अंकांें को डायल कर करते हैं। गिफ्ट, उपहार व दावत की मांग करना। वैसे तो ऐसे कोड देशभर में रिश्वत लेने के लिए इस्तेमाल होते हैं लेकिन सरकारी कर्मचारी ज्यादातर इसी तरीके का इस्तेमाल करती है। उपहार की मांग करना ‘साफ-सुथरी रिश्वत’ लेने का तरीका है। चार्जशीट दाखिल करने में विलंब करने की बात हो या साक्ष्यांे और गवाहों को नजरअंदाज कराने जैसे काम, ऐसे केसों में पुलिस इसी तरीके का इस्तेमाल करती है। बाहर मिलो-इसका मतलब होता है कि आओ बाहर मिलते हैं। पुलिस वाले रिश्वत लेने के लिए थाने से बाहर ऐसी जगह का चुनाव करते हैं जहां उन्हें कोई देख ना ले। लीटर और मीटर-सरकारी कर्मचारी का यह सबसे कॉमन कोड है। सीधे पैसे की मांग नहीं करेंगे, बल्कि एक वाक्य के सहारे गेंद आपके पाले में डाल देंगे। संकेत मिलते ही पीड़ित समझ जाता है। अधीनस्थ से मिल लो-पद में वरिष्ठ खुद रिश्वत नहीं लेते, बल्कि कह देते है फला से मिल लो, फलां पहले ही बता देगा, ‘साहब बहुत कड़क आदमी है। इतने से कम में काम नहीं चलेगा’ यानी साफ है इंस्पेक्टर या ऊपर रैंक के कर्मी वाया कांस्टेबल रिश्वत लेते हैं। ख्याल रखों हम देखते हैं-इस कोड के माध्यम से जब केस सेटल हो जाए तो ख्याल रखना और कुछ देना। वजन कितना है-यह कोड ऐसे केस में बोला जाता है जब कोई शख्स मामला सुलझाने के लिए आता है। ऐसे में उन्हें हाथ पर वजन रखने यानी कुछ कैश देने के लिए कहा जाता है। उंगलियों का इशारा-उंगलियों के इशारे से किसी शख्स को काम की कीमत बताया जाता है। यह कीमत हजार या लाख में होती है, यानी जितनी उंगली उठी होगी, उतने हजार या लाख की मांग की जाती है। खर्चा होगा-जब किसी विवाद के सिलसिले में अधिकारी जब जान नहीं पाते कि व्यक्ति रिश्वत देकर हल चाहता है या नहीं, तब वह इस कोड का इस्तेमाल करता है। बातचीत के बीच में ही वह कहता है कि मामला हल तो हो जाएगा पर खर्चा होगा। यानी अब व्यक्ति को तय करना होता है कि क्या वह रिश्वत देना चाहता है।
जांच बन जाती है सुरक्षा कवच
कभी-कभी दोषियों के विरूद्ध साक्ष्य मिलने पर उच्चाधिकारियों द्वारा जांच अधिकारी नियुक्त किये जाते हैं, और दोषी अधिकारी जांच अधिकारी से अनुनय विनय करके नौकरी बचाने का वास्ता देकर जांच में क्लीन चिट पाने के लिए 90 डिग्री तक पहुंच जाते हैं और दण्डवत होकर उपहार व कई तरह के लालच देकर अपना काम बनवा लेते हैं। जांच अधिकारी अपने ही विभाग के कर्मचारी को बचा लेते है, ताकि हम अगर कभी फंसे तो हमको भी पनाह मिल जाये। ऐसे में जनता में चर्चाओं का बाजार काफी गर्म हो जाता है। लेकिन कोई भी सिस्टम से सवाल करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता हैं
रंगे हाथों पकड़े जाने के डर से होता है लिफाफे का प्रयोग
जब रुपयों से भरा लिफाफा लेकर पीड़ित पहुंचता है तो घूस हाथ में लेने के बजाय टेबल के पीछे रखने के लिए आंखों से इशारा किया जाता था। किसी गलती के लिए पुलिस की गिरफ्त में आ गए हैं और आपको तीन शब्द ‘‘अपना आदमी है, पुलिस की मदद करता है’’ सही उच्चारण के साथ बोलना आता है तो बहुत संभावना है कि आपको डांट-डपट व चेतावनी के साथ छोड़ दिया जाएगा। यह भी हो सकता है कि सरकारी कर्मचारी आपसे रिश्वत की मांग भी करें लेकिन इसके लिए वे सीधी मांग नहीं करते बल्कि कोड-वर्ड्स का इस्तेमाल करते हैं। जिले के कई विभाग ऐसे हैं जहां पर कदम-कदम पर वसूली होती है, पीड़ित को भविष्य की चिंता होती इसलिए पीड़ित डर व भय के कारण सब कुछ सहन करने पर मजबूर नजर आता है।
अब्दुल मुईद सिटी-रिपोर्टर (एस0एम0 न्यूज24टाइम्स) 9936900677

