मुख्यमंत्री जी! कोर्ट के स्थगन आदेश को नहीं मानती बाराबंकी पुलिस विवादित भूमि प्रकरण में वादी पक्ष रच रहा षड्यंत्र

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

दबंग माफिया ने करवाया अवैध निर्माण तो बाबा ने कटवा दिए हरे पेड़

बाराबंकी। कस्बा व थाना सतरिख क्षेत्र में विवादित भूमि पर अवैध निर्माण के सम्बन्ध में चल रहा प्रकरण तूल पकड़ता जा रहा है। शिकायती पत्रों की अनदेखी व पुलिस द्वारा न्यायालय के आदेश की अवहेलना भी जमकर की जा रही है। जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की मनमानी से त्रस्त शिकायतकर्ता को लेकिन अभी भी प्रशासन से न्याय की उम्मीद है। उधर, विपक्षी द्वारा विवादित ज़मीन पर कब्ज़ेदारी को लेकर कोई न कोई नया शिगूफा गढ़ा जा रहा है। आपको बता दें कि, न्यायालय के स्थगन आदेश बावजूद नगर पंचायत सतरिख कस्बा क्षेत्र में गाटा संख्या 245 पर दबंग माफिया द्वारा विवादित भूमि पर थाना सतरिख पुलिस के संरक्षण में जबरन अवैध निर्माण बीती 27 अगस्त को करवाया जा रहा था। इस बाबत जब पीड़ित राजकुमार पांडेय ने लिखित शिकायती पत्र थाने पर दिया तो उसे भगा दिया गया। पीड़ित ने त्वरित रूप से सीएम योगी आदित्यनाथ को स्थानीय पुलिस की कार्यशैली से अवगत कराते हुए आईजीआरएस पर शिकायत की। साथ ही, निर्माण को तत्काल रुकवाये जाने की भी मांग की है। लेकिन, मामला अभी इतने पर नहीं थमा। बीती 29 अगस्त को पीड़ित पुलिस अधीक्षक अनुराग वत्स से मिलकर उन्हें अपनी पीड़ा बताने व शिकायती पत्र देने गया। जब पीड़ित राजकुमार पांडेय ने उक्त भूमि विवाद के मुकदमे को वर्ष 1992 से बाराबंकी के अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कोर्ट संख्या 23 में प्रचलित बताते हुए कोर्ट का स्टे आर्डर की प्रति दिखाई तो एसपी ख़ुद पीड़ित को ही कानून समझाने लगे। पीड़ित के मुताबिक, एसपी ने स्थगन आदेश की समय सीमा मात्र 6 माह बताई। इस पर पीड़ित ने न्यायालय से प्रश्नोत्तरी निकलवाई। जिसमे यह न्यायालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि मामले में स्थगन आदेश प्रभावी है। उस प्रश्नोत्तरी की प्रति लेकर पीड़ित अगले दिन पुनः एसपी से मिलने गया तो पीड़ित के मुताबिक़, एसपी न्यायालय द्वारा जारी की गई प्रश्नोत्तरी को ही फर्जी बता डाला। एसपी अनुराग वत्स के इस जवाब के बाद पीड़ित स्वयं को असहाय महसूस करने लगा। उधर 31 अगस्त को उक्त विवादित भूमि पर लगे हरे बाँस के पेड़ों की भी अवैध रूप से कटान शुरू हो गई। इसकी शिकायत जब 100 नम्बर पर की गई तो मौके पर पुलिस पहुंची। पुलिस के मना करने पर करीब एक घंटे तक मामला शांत रहा। लेकिन, पुनः वही कार्य शुरू कर दिया गया। विदित हो कि, विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश 27 अगस्त 1992 को ही दे दिया था। वह मामला अभी भी विचाराधीन है। जिसकी अगली सुनवाई आगामी 09 सितम्बर 2022 को होनी तय है। इस मामले में खास बात यह है कि, उक्त मुकदमे का वादी नानक शरण की मिलीभगत से अज्ञात दबंग माफिया ने न्यायालय के आदेश को धता बताते हुए अवैध निर्माण शुरू कर दिया। पुलिस के संरक्षण में अवैध निर्माण हुआ है। मौके पर पुलिस खड़ी थी और निर्माण लगातार जारी था। जबकि, नानक शरण उक्त मुकदमे का पक्षकार भी नहीं है। इस मामले के संदर्भ में एसपी अनुराग वत्स और थानाध्यक्ष सतरिख, दोनों के बयान एक जैसे हैं। दोनों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कोई भी स्थगन आदेश 6 महीने से अधिक मान्य नहीं हैं। पीड़ित को न्यायालय की शरण मे जाना चाहिए।मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

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