कासिम सुलेमानी की याद वफ़ादारी की दलील है-मौ.इब्ने अब्बास रौजों के मुहाफ़िज़ का नाम कासिम सुलेमानी है बातिल के दिल जिसके नाम से लरज़ जाय उसे कासिम सुलेमानी कहते हैं
सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी
बाराबंकी । कासिम सुलेमानी की याद वफ़ादारी की दलील है । रौजों के मुहाफ़िज़ का नाम कासिम सुलेमानी है । बातिल के दिल जिसके नाम से लरज़ जाय उसे कासिम सुलेमानी कहते हैं । वो मजलिस मजलिस नहीं जिसमें इंसानों में तबदीली न आये । इंसान जिन्दा रहे तो भी अल्लाह के लिए और पलट कर उसी की तरफ जाने वाले है । यह बात मौथरी में मौथरी के मोमनीन के ज़रिये शहीद जनरल कासिम सुलेमानी, अबू मेहदी मुहंदिस आली जनाब मौलाना इब्ने अब्बास साहब क़िबला ने कही। शीयत व हुसैनी जहाँ जहाँ पाये जायेंगे , कासिम सुलेमानी की मज लिस करेंगे ।जो अल्लाह के लिए जीते है उसका ज़िक्र क़ायनात के ज़र्रे ज़र्रे में होता है। आखिर में आले मोहम्मद के मसायब पेश किया जिसे सुनकर मोमनीन रो पड़े । मजलिस से पहले मक़ामी शोअरा ने नज़रानये अक़ीदत पेश किया । बानियाने मजलिस अजा़ दाराने मौथरी ने सभी का शुक़्रिया अदा किया।
सगीर अमान उल्लाह जिला ब्यूरो बाराबंकी

