क्या इदलिब से शुरु होगा तीसरा विश्व युद्ध? रूस व अमरीका में टकराव की आंशका बढ़ी… तुर्की की अमरीका से गुहार, सीरिया से तुर्क सैनिक नहीं गये तो ताबूतों में भेंजेंगे!

संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीकी प्रतिनिधि केली क्राफ्ट ने सीरिया के इदलिब के बारे में सुरक्षा परिषद की बैठक में मास्को से मांग की कि वह सीरिया में अपने युद्धक विमानों की उड़ान  तत्काल रोक दे।
 
केली क्राफ्ट ने कहा कि हम रूसी फेडरेशन से मांग करते हैं कि वह सीरिया में अपने युद्धक विमानों की उड़ान तत्काल बंद करे और सभी सीरियाई सैनिकों और उनके घटक रूस से मांग करते हैं कि वह सन 2018 में रेखांकित की गयी सीमाओं का ख्याल रखें। सीरिया के इदलिब में तुर्की के 34 सैनिकों की सीरियाई सेना के हाथ मौत के बाद ब्रिटेन की मांग पर सुरक्षा परिषद की अपातकालीन बैठक का आयोजन हुआ। अमरीकी की प्रतिनिधिक केली क्राफ्ट ने कहा कि अमरीका, इदलिब में तुर्की सैनिकों की मौत पर अन्करा की जवाबी कार्यवाही का समर्थन करता है। इस बैठक में रूसी प्रतिनिधि वासेली नेबेन्ज़िया ने कहा कि यह घटना, सीरिया में रूसी छवनियों से बाहर हुई है और सीरिया को आतंकवादियों के दमन का पूरा अधिकार है। इस बैठक में सीरिया के प्रतिनिधि बश्शार जाफरी ने इस बैठक में कहा कि दमिश्क़ अपनी भूमि पर आतंकवाद के खिलाफ युद्ध कर रहा है और इदलिब सीरिया का क्षेत्र है।बश्शार जाफरी ने कहा कि निरीक्षण के लिए निर्धारित क्षेत्र से हट कर तुर्क सैनिकों की उपस्थिति से साबित होता है कि वह आतंकवादियों का साथ दे रहे थे और तुर्की की सरकार ने सीरिया में बनाए गये निरीक्षण केन्द्रों को आतंकवाद के समर्थन के केन्द्रों में बदल दिया है।

उन्होंने कहा कि अर्दोगान ने तुर्की सेना को मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखा बना दी है।तुर्की के प्रतिनिधि ने कहा कि बश्शार असद सीरियाई जनता का प्रतिनिधित्व नहीं करते और तुर्की की सेना आम नागरिकों की रक्षा के लिए सीरिया गयी है।इदलिब के खिलाफ सीरिया की सैन्य कार्यवाही को रूस का समर्थन प्राप्त है। रूस ने सीरियाई सरकार की सहमति के बिना सैन्य कार्यवाही या मानव प्रेमी सहायता के के प्रस्तावों को अब तक 14 बार वीटो किया है।
हालांकि तुर्की इदलिब के मामले पर नेटो से मदद की गुहार लगा रहा है और अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए इदलिब से निकलना भी नहीं चाह रहा है। अब तो यह भी खबरें आ रही हैं कि इदलिब में हिज़्बुल्लाह और तुर्की के सैनिकों के बीच युद्ध शुरु हो चुका है। तुर्की के सैनिकों का साथ आतंकवादी संगठन दे रहे हैं। रायुल यौम ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अब तक कई तुर्क सैनिक हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों के हाथों मारे जा चुके हैं। खबर है कि हिज़्बुल्लाह ने तुर्क सैनिकों से लड़ने के लिए एक हज़ार लड़ाके भेज दिये हैं। इदलिब में अगर युद्ध फैला तो उसका दायरा काफी बड़ा होगा। एक तरफ तुर्की है और दूसरी तरफ सीरिया, तुर्की नेटो और अमरीका को मदद के लिए बुला रहा है लेकिन अर्दोगान रूस से कह रहे हैं कि हमें सीरिया के साथ अकेला छोड़ दिया जाए।
एक सीरियाई सांसद ने कहा है कि अगर तुर्की के सैनिक इदलिब से वापस नहीं गये तो फिर उन्हें ताबूतों में वापस भेजा जाएगा। ओटोमान साम्राज्य की वापसी और पूरे इलाक़े पर राज करने का सपना देखने वाले राष्ट्रपति अर्दोगान के लिए यह सब कुछ सहन करना बहुत कठिन है। लेकिन  अर्दोगान के लिए विकल्प बड़ी तेज़ी से खत्म हो रहे हैं। फिलहाल तुर्की का साथ अमरीका देगा, सीरिया का साथ रूस और हिज़्बुल्लाह और ईरान दे ही रहे हैं तो फिर लड़ाई हुई तो अंजाम क्या होगा?

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