धरती पर पाप कर्म करने वाली आत्माओं को नरक लोक में भुगतना पड़ेगा दंड – स्वामी रामचंद्राचार्य महाराज

आई एम खान संवाददाता (एसएम न्युज 24 टाइम्स) बिसौली- बदायूं 8273974747

बिसौली। व्यक्ति के समस्त कर्मों में एकमात्र भक्ति ही ऐसा सत्कर्म है जो कभी नष्ट नहीं होती। धरती पर पापकर्म करने वाली आत्माओं को नरकलोक में दंड भुगतना पड़ता है। अग्रवाल धर्मशाला में चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन उक्त उद्गार व्यक्त करते हुए स्वामी रामचंद्राचार्य महाराज ने कहा कि प्रत्येक कार्य करने के बाद लक्ष्य प्राप्ति में या तो सफलता हासिल होती है या फिर असफलता। लेकिन भक्ति करने वाले को या तो लक्ष्य प्राप्त होता है और यदि लक्ष्य न भी मिले तो भक्ति से प्रभु कृपा अवश्य मिलती है। भागवत कथा का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने नरकलोक की प्रासंगिकता का वर्णन किया। राजा परीक्षित के प्रश्न का उत्तर देते हुए शुकदेव जी ने कहा कि ब्रह्मांड में नरकों की कुल संख्या 28 है। सभी नरकलोक तीनों लोकों और गर्भोदक सागर के मध्य स्थित हैं। पितृलोक भी इसी गर्भोदक सागर तथा अधःलोकों के मध्य के प्रदेश में स्थित है। नरकलोकों में पापकर्म करने वाली जीवात्माओं को दंडित किया जाता है। इस अवसर पर कृष्णकांत अग्रवाल, विष्णुकांत अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, रविप्रकाश अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, पूर्णानंद शर्मा, दीपक बाबी, प्रमोद यादव, डा. प्रवीन शर्मा, धर्मेन्द्र वार्ष्णेय, विपिन अग्रवाल, अरविन्द अग्रवाल, विमला, सरिता, मधु आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आई एम खान संवाददाता (एसएम न्युज 24 टाइम्स) बिसौली- बदायूं 8273974747

Don`t copy text!