27 वें वार्षिकोत्सव के अंतिम दिन प्रातः पंच कुंडीय यज्ञ आयोजित किया गया ।

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी । वेद विरूद्ध आचरण और मान्यताओं के कारण मानवता कराह रही है । आज पूरा विश्व ईर्ष्या, द्वेष , कलह और युद्धों की विभीषिका से त्रस्त है । आज विश्व बारूद के ढेर पर बैठा है । परमाणु अस्त्रो की होड़ ने मानवता के लिए भीषण खतरे की पृष्ठभूमि तैयार कर दी है । ऐसी विषम परिस्थितियों का मूल कारण है वेद ज्ञान से विरत होना ।


आर्य समाज सोमैयानगर के 27 वें वार्षिकोत्सव के अंतिम दिन प्रातः पंच कुंडीय यज्ञ आयोजित किया गया । यज्ञ के पश्चात उक्त विचार प्रकट करते हुए बरेली से पधारे पंडित जितेन्द्र देव आर्य ने कहा कि वेद के पथ पर चलने से ही संसार का कल्याण संभव है ।
रोहतक से पधारे आचार्य सत्य ब्रत ने कहा कि प्रायः लोगों का विचार होता है कि यज्ञ मे डाले गए घृत आदि पदार्थ व्यर्थ ही चले जाते हैं । किन्तु उनका यह विचार ठीक नहीं है । यज्ञ मे डाले गए सुगन्धित, पौष्टिक और रोगनाशक पदार्थ सूक्ष्म होकर हमारे सम्पूर्ण पर्यावरण को शुद्ध करते हैं ।
आचार्य सत्य प्रकाश आर्य ने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि यज्ञ से सभी शुभ कामनायें पूर्ण होती हैं । यज्ञ से वायुमंडल मे उत्पन्न सुगन्धि से सभी प्राणी आनंद का अनुभव तो करते है किन्तु यज्ञ की सुगन्धि प्राप्त करने वाले याज्ञिक को नही जानते हैं यही निष्काम परोपकार यज्ञ कहलाता है ।
सुल्तान पुर से पधारे पंडित राम मगन आर्य ने कहा कि अग्निहोत्र से वायु ,वृष्टि ,जल आदि सम्पूर्ण पर्यावरण शुद्ध होता हैं । आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने अपने परीक्षणों मे यज्ञ द्वारा वायुमंडल की शुद्धि को देखकर इस वैदिक यज्ञ पद्धति को स्वीकार किया है ।
रात्रि कालीन सत्र मे लखनऊ से पधारे पं• सर्वमित्र शास्त्री और रसौली से आये दो बच्चों सुशांत आर्य तथा हर्षाली आर्य ने अपने भजनों से उपस्थित श्रोताओ को मंत्रमुग्ध कर दिया ।
इस अवसर पर आर्य समाज बाराबंकी के भवन का जीर्णोद्धार कराने हेतु एक लाख रुपए का दान देने वाले लखनऊ के रवीन्द्र भण्डारी और आगन्तुक विद्वानों का प्रधान राजीव अवस्थी ,आर्य प्रतिनिधि सभा के अंतरंग सदस्य डाक्टर राम नारायण आर्य , राम कुमार श्रीवास्तव, शांति स्वरूप आर्य, रमापति अवस्थी ,जगदेव प्रसाद, राम चन्द्र अग्रवाल, सुधीर सक्सेना, मुनि अर्जुन देव ने माल्यार्पण करके स्वागत किया । शांति पाठ के पश्चात कार्य-क्रम का समापन हुआ ।

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