मसौली बाराबंकी। विकास खण्ड मसौली की ग्राम सिसवारा स्थित दिगंबरनाथ मंदिर मे चल रहे सप्तम सिद्ध सात्त्विक श्री रुद्रात्मक हनुमंत महायज्ञ एव मानस वेदांत सम्मेलन के प्रथम दिन हरदोई से आये कथाव्यास उत्तम व्यास ने भोलेबाबा एव सती माता की रामकथा सुनाई।
यज्ञाधीश श्री विनोदाचार्य जी के निर्देशन मे चल रहे हनुमंत महायज्ञ एव मानस वेदांत सम्मेलन मे कथवाचक उत्तम व्यास ने कहा कि त्रेतायुग में भगवान श्री राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज कर रहे थे। उसी समय माता सती भगवान शिव के साथ कैलाश पर बैठ यह लीला देख रहीं थीं। माता सती के मन में ख्याल आया कि श्री राम स्वयं भगवान विष्णु के अवतार है, वह चाहे तो तुरंत रावण का पता लगा उसका वध कर सकते हैं। उन्होंने यही सवाल भगवान शिव से पूछा, तो उन्होंने कहा कि यह सत्य है कि प्रभु श्रीराम भगवान विष्णु के अवतार हैं, लेकिन उन्होंने पृथ्वी पर एक मनुष्य के रूप में जन्म लिया है। इसलिए वह मनुष्यों की तरह जीवन जी रहे हैं।
तब माता सती ने निश्चय किया कि वे श्रीराम की परीक्षा लेंगी। उन्होंने अपने पति भगवान शिव से इसकी आज्ञा मांगी। भगवान शिव ने उन्हें समझने की कोशिश कि यह उचित नहीं है। श्रीराम स्वयं सच्चिदानंद हैं इसलिए उनकी परीक्षा लेना उचित नहीं होगा, उनके बार-बार समझाने के बाद भी माता सती नहीं मानीं।
माता सती ने देवी सीता का रूप धारण किया और उसी रास्ते पर बैठ गईं जहां से थोड़ी ही देर में श्रीराम और लक्ष्मण गुजरने वाले थे। जब श्रीराम और लक्ष्मण वहां से गुजरे तब श्रीराम की नजर उन पर पड़ी उन्होंने हाथ जोड़कर प्रणाम करते हुए कहा कि माता क्या आज आप अकेले ही वन विहार पर निकली हैं। मेरे प्रभु भगवान शिव कहां हैं। यह सुनकर माता सती बहुत ही लज्जित हुईं और अपने वास्तविक रूप में आते हुए उन्होंने श्रीराम को देवी सीता की खोज में सफलता का आशीर्वाद दिया एवं अपने गंतव्य कैलाश पर्वत को चली गईं। जब भगवान शिव जी ने उनसे पूछा कि क्या आपने श्रीराम की परीक्षा ली थी, तब माता सती ने उनसे कहा कि उन्होंने श्रीराम की कोई भी परीक्षा नहीं ली।
प्रवचन करते हुए उत्तम व्यास ने आगे कहा कि भगवान श्री राम की परीक्षा लेने के लिए माता सती ने भोलेनाथ से सच को छिपाया, जिसके कारण महादेव ने सती का परित्याग कर दिया। अपनी गलती से सती माता भगवान शिव से दूर हो गई। आज भी हमारे समाज में संबंध बनते हैं, लेकिन आपसी भाईचारा, प्रेम व विश्वास नहीं रहने के कारण बहुत जल्द टूट जाते है। पति-पत्नी के रिश्ते का आधार आपसी प्रेम व विश्वास है। हर रिश्ता विश्वास की बुनियाद पर टिका है, लेकिन इस रिश्ते में विश्वास सर्वोपरि है। मौके पर पुजारी शिवकुमार वर्मा, पूर्व प्रधान ओमकार यादव, हरिश्चंद्र पुजारी, महेन्द्र कुमार लवकुश यादव किशोरी लाल जगदीश प्रसाद अशोक रावत रामनरेश वर्मा रमेश यादव, चौ0 शैलेन्द् कुमार रावत , दिलीप कुमार, प्रवीण कुमार मिश्रा, रिशी यादव, सतीश शर्मा, राजकुमार यादव, मैकूलाल, अजय यादव,अवध राम गुप्ता,श्यामाचरण गुप्ता सहित भारी संख्या में भक्तगण मौजूद थे।

