रामकथा के दूसरे दिन देवी मां पार्वती के जन्म, कामदेव के भस्म होने और भगवान शिव द्वारा विवाह के लिए मान जाने की कथा सुनाई।
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी
मसौली बाराबंकी। ग्राम सिसवारा स्थित दिगंबरनाथ मंदिर मे यज्ञाधीश श्री विनोदाचार्य जी के निर्देशन मे चल रही रामकथा के दूसरे दिन देवी मां पार्वती के जन्म, कामदेव के भस्म होने और भगवान शिव द्वारा विवाह के लिए मान जाने की कथा सुनाई। कथा वाचक उत्तम व्यास ने कहा कि जब भगवान शंकर माता सती को राम कथा सुना रहे थे, तभी आकाश मार्ग से कई देवता जा रहे थे। सती के पूछने पर भगवान शंकर ने बताया कि दक्ष प्रजापति ने घमंडवश ब्रह्मा, विष्णु व महेश का अपमान करने के लिए अपने घर महायज्ञ का आयोजन किया था। इसमें तीनों देवताओं को नहीं बुलाया गया। सती ने जब वहां जाने की इच्छा जताई तो भगवान शंकर ने बिना बुलाए जाने पर कष्ट का भागी बनने की बात कही। इसके बाद भी सती नहीं मानी और पिता के घर चली र्गइं। यज्ञ में भगवान शंकर, विष्णु व ब्रह्मा का अपमान देखकर हवन कुंड में कूदकर खुद को अग्नि के समर्पित कर दिया। इसके बाद भगवान शंकर के दूतों ने यज्ञ स्थल को तहस-नहस कर दिया। भगवान शंकर भी शोकाकुल होकर समाधि में लीन हो गए।
कालांतर में माता सती देवराज हिमालय के घर में पार्वती के रूप में पैदा हुईं। वहां पहुंचे देवर्षि नारद ने हिमालय राज और माता मैनावती के सम्मुख बेटी का भाग्य बताते हुए कहा कि इसे जो वर मिलेगा वह शिव जैसा होगा। माता पार्वती ने भगवान शिव को ही पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या शुरू कर दी।
दूसरी ओर भगवान शंकर समाधि में लीन थे। देवी पार्वती का शिव से विवाह कराने के लिए समाधि भंग करना जरूरी था। ऐसे में देवताओं ने कामदेव को भेजा। कामदेव ने ध्यान भंग करने का प्रयास किया तो नाराज भगवान शंकर ने तीसरा नेत्र खोल दिया। जिससे कामदेव वहीं भस्म हो गए। कामदेव की पत्नी रति विलाप करते हुए भगवान शंकर के पास पहुंची। क्षमा याचना के बाद शिव ने कामदेव को द्वापर युग में श्रीकृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेने का आशीर्वाद दिया था। समाधि टूटने के बाद भगवान विष्णु ने भगवान शंकर से पार्वती को पुन: अंगीकार करने की प्रार्थना की। भगवान शंकर ने सप्तऋषियों को पार्वती की परीक्षा लेने के लिए भेजा। पार्वती ने केवल शिव को ही अपना वर चुनने की बात कही। इसके बाद शिव पार्वती को पुन: अपनाने के लिए राजी हो गए।
इस मौक़े पर पुजारी शिवकुमार वर्मा, हरिश्चंद्र पुजारी, महेन्द्र कुमार लवकुश यादव किशोरी लाल जगदीश प्रसाद अशोक रावत रामनरेश वर्मा रमेश यादव, चौ0शैलेन्द् कुमार रावत , दिलीप कुमार, ,देवीशंकर सोनी, भल्लन वर्मा, प्रवीण कुमार मिश्रा, रिशी यादव, सतीश शर्मा, राजकुमार यादव, मैकूलाल, अजय यादव,अवध राम गुप्ता,श्यामाचरण गुप्ता सहित भारी संख्या में भक्तगण मौजूद थे।

