शिव गंगा साहित्य सेवा समिति के तत्वावधान में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी। शिव गंगा साहित्य सेवा समिति के तत्वावधान में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन शिव गंगा मैरेज लॉन मसौली में समिति के अध्यक्ष राजकुमार सोनी की अध्यक्षता मे की गयी। गोष्ठी का प्रारंभ गीतकार कवि अजय अटल की वाणी वंदना से हुआ।
इस बार काव्य गोष्ठी में व्यंग्य लोकगीतकार कवि रामकिशुन यादव का सम्मान अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर किया गया ।
अध्यक्ष ओजकवि राजकुमार सोनी ने पढ़ा “मर्यादित जीवन बिताया यदि धरती पे,
एक दिन तुम्हे प्रभु राम मिल जायेंगे।” कवि संतोष कुमार ने पढ़ा ” मोम के सिपाही न भेज पिघल जाएंगे,हम सूरज हैं आग लेकर किधर जाएंगे।”
कवि नागेंद्र सिंह ने पढ़ा ” जहां– जहां जो–जो कुर्सी पर बइठा है, काट रहा है अंदर–अंदर माल बहुत।” कवि कुमार पुष्पेंद्र ने पढ़ा ” विरह कबिरा,विरह तुलसी,विरह मीरा ने पहचाना, विरह की राख में ही तो मिलन के फूल खिलते हैं।” कवि रामकिशुन यादव ने पढ़ा ” नमस्ते नमस्ते गुरुजी नमस्ते। जीवन मेरा बीते सदा हँसते–हँसते।”
कवि अजय अटल ने पढ़ा ” ओ मेरी मन मयूरी तू बना कर मुझ से दूरी क्यों, न जाने किस घटा पर तू कहां जाकर के मचली तू” कवि अमरजीत यादव ने पढ़ा ” तुम्हारा फोन नंबर चाहते हैं, अगर वाजिब लागेब्टो भेज देना।” कवि कुंदन सिंह ने पढ़ा ” सदियों से सियाराम के वियोग में ,तड़प रहे थे सब नर नारी।”
कवि शिवेंद्र सिंह सोनू ने पढ़ा ” चोट अंदर की है तूने मारी, आंख भी रो सके न बेचारी।” कवि ध्यान सिंह चिंतन ने पढ़ा ” योग संयोग बदल जाएंगे,विरह भी प्रेमगीत गाएंगे सज रही अवधपुरी पावन, फिर मेरे राम महल आयेंगे।” कवि वीरेंद्र सिंह करुण,प्रशांत रावत, जैसराम, रमेश चंद्र रावत, शिव कुमार मौर्या आदि ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति की।
गोष्ठी का संचालन हास्य व्यंग्यकार कवि नागेंद्र सिंह ने किया।

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