मसौली बाराबंकी। वर्ष की पहली बारिश ने ठंड मे बढ़ोतरी कर दी शुक्रवार की देर शाम अचानक शुरु हुई तेज बारिश ने लोगो को घरो मे कैद कर दिया। शीत लहर के चलते तापमान मे काफी गिरावट आयी है।
शुक्रवार की सुबह से ही मौसम का मिजाज बिगड़ गया और देर शाम अचानक बूंदाबांदी के साथ तेज बारिश शुरू हो गई और देखते ही देखते सर्दी बढऩे के कारण लोगों मे कंपकंपी का अहसास होने लगा। बेमौसम बारिश से लोग घरो मे दुबक गये। वही लोग आग के निकट बैठे नजर आये। स्कूल और कॉलेज पहले से ही बंद चल रहे हैं। जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से निकले इसके चलते वाहनों की संख्या भी सड़कों पर कम ही दिखी। बारिश से कई जगह सड़कों पर पानी जमा हो गया और खेतों में भी पानी भर गया है। बूंदाबांदी और बारिश के बीच ठंडी हवा तेज चलने से सर्दी एकाएक बढ़ गई।
( गेहूं को फायदा तो आलू मे झूलसा रोग लगने की अशंका )
शुक्रवार को हुई बारिश से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा फायदा हुुआ, जबकि आलू, सरसों की फसल पर रोग लगने का खतरा मंडराने लगा है। किसान गेहूं की फसल की सिंचाई कर रहे थे। बारिश से गेहूं की फसल की सिंचाई अब कुछ दिन नहीं करनी पड़ेगी। किसानो का कहना है कि यह बारिश गेहूं के लिए मुफीद है। आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका है।
( फसलों की रखवाली करने वाले किसानो की बढ़ी मुश्किले )
बारिश के साथ ही बढ़ी सर्दी से किसान फसलों की रखवाली के लिए चिंतित हो गये है। हालात ये हैं कि किसानों को कड़ाके की ठंड और घनघोर अंधेरी रात में खून-पसीने की कमाई को छुट्टा पशुओं से बचाने को खेत में पहरा देना पड़ रहा है। शीत लहर के प्रकोप के बीच कड़ाके की सर्दी में रातभर जागकर किसान फसलों की रखवाली करने को मजबूर है। हाथ में लाठी व टार्च लेकर खेत पर डेरा जमाए इन किसानों की रात दर्दभरी है। इन दिनों रात के समय न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस के नीचे आ जा रहा है। अलाव जलाकर सर्द रातें कट रही हैं। किसान रात में फसलों की पहरेदारी करने को मजबूर हैं। वे झुंड में घुसे छुट्टा पशुओं को खेत से निकालते हैं लेकिन थोड़ी देर बाद फिर लौट आते हैं। समझ में नहीं आता कि क्या करें।
किसान किसी तरह हाँक लगाकर आवारा पशुओं को निकट के गौआश्रय स्थल ले भी जा रहे है तो जिम्मेदार लोग लक्ष्य से अधिक पशु होने का रोना रोकर पशुओ को नही ले रहे है। बहरहाल बारिश ने किसानो का जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है।
Related Posts

