जब जब पृथ्वी पर अत्याचार होता है साधु-संतों भक्त सताए जाते हैं तब तब भगवान को अनेक रूपों में अवतार लेना पड़ता है।
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी
मसौली बाराबंकी। कस्बा बांसा मे चल रही 5 दिवसीय संगीतमयी श्रीराम भगवत कथा के तीसरे दिने महमूदाबाद सीतापुर से पधारे कथा वाचक अर्जुन कुमार ने कहा कि जब जब पृथ्वी पर अत्याचार होता है साधु-संतों भक्त सताए जाते हैं तब तब भगवान को अनेक रूपों में अवतार लेना पड़ता है।

कथावाचक ने श्री रामचरितमानस मे लिखी चौपाई को सुनाते हुए कहा कि जब -जब होई धरम की हानी,बाढ़हि असुर अधम अभिमानी, तब-तब धरि प्रभु विविध शरीरा, हरहि दयानिधि सज्जन पीरा अर्थात जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, दुष्टों का प्रभाव बढ़ने लगता है, तब सज्जनों की पीड़ा हरने के लिए प्रभु का अवतार होता है।
श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को भागवत कथा सुनाते हुए कथावाचक ने कहा कि भागवत कथा श्रवण मात्र से मन के सारे क्लेश एवं दुख दूर हो जाते हैं। भागवत कथा के जरिये हम भगवान को प्राप्त कर सकते हैं। मानव जन्म से हम स्वर्ग को जा सकते हैं, इस देह से हमें छुटकारा मिल सकता है। भगवान श्रीकृष्ण को सबसे प्रिय है भागवत कथा। हमें हर क्षण ठाकुर जी का कीर्तन करते रहना चाहिए। कहा कि मानव मोह माया में फंसकर यह भूल जाता है कि उसका जन्म किस लिए हुआ है। ऐसे में वह अपने जन्म का उद्देश्य पूरा नहीं कर पाता है।
उन्होंने मनु और शतरूपा की कथा मे कहा कि नेमिष तीर्थ में गोमती नदी के तट पर तपस्या की थी उसका प्रतिफल स्वरूप है भगवान श्री राम जी का अवतार श्री मनु और शतरूपा ने गोमती नदी के तट पर भगवान से मांग किया था कि चाहहु तुम्हहि समान सूत प्रभू सन कवन दुराव आपके जैसे संतान की आवश्यकता है और जब भगवान महारानी सतरूपा के पास गए तो सतरूपा जी ने कहा कि जो वरदान चतुर नृप मांगा सोई कृपाल मोहि अति प्रिय लगा वही दोनों दशरथ कौशल्या हुए और अयोध्या धाम में महाराज दशरथ जी के यहां मां कौशल्या के उदर से अखिल ब्रह्मांड के नायक चराचर जगत के नियंता मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का प्रादुर्भाव श्री अवध के महाराज दशरथ जी के यहां हुआ।
इस मौक़े पर कथा आयोजक पवन यादव, शेष कुमार रावत, रामसिंह, अमित कुमार, राजेंद्र यादव, अनिल वर्मा, रामानंद वर्मा व भक्तगण उपस्थित रहे।

