कमीशन खोरी के चलते भूख प्यास से तड़प तड़प कर मर रही गौ माता….

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी । सपा सरकार मे जहां गौवंश कुटीर उद्योग की तरह नित्य कसाइयों की छुरी के तले कटता था वही गौवंश अब सरकारी गौ आश्रय स्थलों मे भूख प्यास से व्याकुल होकर घुट घुट कर मरने को मजबूर है । शासन की मंशा के विपरीत अधिकांश गौ आश्रय स्थलों की दशा कमीशन खोरी के चलते काफी बदतर है ।
क्षेत्र की अधिकांश गोशालाओं मे गौवंशो के रख रखाव के लिए समुचित प्रबंध सिर्फ कागज पर हैं । जमीनी हकीकत कागजी आंकड़ो से ठीक उलट है । गौरतलब है कि गौआश्रय स्थलों के प्रबंध तंत्र से जुड़े अधिकारी – कर्मचारियों को गौवंशो के चारा – भूसा , जल और औषधि ब्यवस्था मे कमीशन खोरी की लत लग चुकी है ।

ऐसे तो प्रत्येक गौशाला पर लिखा लगा है कि बिना जिलाधिकारी की आज्ञा के कोई गौशाला के अन्दर की स्थिति नहीं देख सकता है किन्तु ग्राम पंचायत मसौली के स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि बीते दिनों हाड़ कपा देने वाली भीषण ठंड मे यहां की गौशाला मे प्रतिदिन 2-4 गौवंश गौशाला मे मृत पड़े रहते थे जिनका कोई पुरसाहाल नहीं था । गौशाला मे मृत पड़े गौवंश को कुत्ते कौवे आदि नोच नोच कर खाते रहे । उक्त गौशाला मे मृत गौवंश की तस्वीरें हृदय विदारक और मन को व्यथित करने वाली हैं ।
इस संबंध मे गौशाला के केयर टेकर का कहना था कि हम क्या करें हमारी रोजी रोटी का सवाल है आश्रय स्थलों के प्रबंधक कहते हैं कि समय पर वेतन लेना है तो चारा पानी मे बचत करो । इन गोशालाओं से गाय लेने वाले किसान- गौपालक भी संबंधित कर्मचारियों के भ्रष्टाचार का शिकार बनते हैं । कर्मचारियों की मुट्ठी गर्म करने बावजूद उन्हे गौपालन के लिए नियत सरकारी सहायता मिलने मे काफी दुश्वारी होती है । ऐसे मे गोशालाओं के संचालन मे ब्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाये बिना सरकार की मंशा फलीभूत होना संभव नही है ।

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