राजा बलि ने राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी अपनी असाधारण भक्ति से भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया.

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी। विकास खण्ड मसौली की ग्राम पंचायत बड़ागांव के मोहल्ला नाली पार स्थित दुर्गा मंदिर पर चल रही 7 दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के 5 वे दिन कथावाचक उमेश महराज ने राजा बाली की तीन त्रिलोक की कथा सुनाकर श्रोताओ को भाव विभोर कर दिया।
कथावाचक उमेश महराज ने धार्मिक पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेता युग में राजा बलि भगवान विष्णु का अनन्य भक्त रहा. राजा बलि ने राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी अपनी असाधारण भक्ति से भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया. राजा बलि राजा विमोचन के बेटे और भक्त प्रहलाद के पौत्र थे. वह हमेशा ब्राह्मणों की सेवा करते थे। अपने इस प्रकार के तप, विनम्र स्वभाव और पूजा से राजा बलि को अनेकों शक्तियां प्राप्त थीं. उन्होंने इंद्र के देवलोक के साथ त्रिलोक पर भी अपना अधिकार जमा लिया, जिसकी वजह से सभी देवता लोकविहीन हो गए। इंद्र को उनका राज्य वापस दिलवाने के लिए ही भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया. वे बौने ब्राह्मण के रूप में राजा बलि के पास गए और उनसे अपने रहने के लिए तीन कदम के बराबर भूमि देने का अनुरोध किया. गुरु शुक्राचार्य के मना करने के बाद भी राजा बलि ने तीन पग भूमि भगवान विष्णु को देने का वचन दे दिया. वचन प्राप्त होने के बाद भगवान विष्णु ने अपना आकार बढ़ना शुरू कर दिया और इतना बड़ा आकर कर लिया कि एक कदम में उन्होंने पूरी धरा नाप ली, दूसरे कदम में देवलोक को नाप लिया. अब उनके तीसरी कदम के लिए भूमि नहीं बची. तब अपने वचन के पक्के राजा बलि ने तीसरे कदम रखने के लिए उनके समक्ष अपना सिर पेश कर दिया । वामन अवतार लिए भगवान विष्णु राजा बलि की वचनबद्धता और भक्ति से बेहद प्रसन्न हुए, और उन्हें पाताल का राज्य दे दिया. इसके अलावा राजा बलि को भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि चातुर्मास में उनका एक रूप क्षीरसागर में चयन करेगा और दूसरा रूप राजा बलि के पाताल लोक की रक्षा करेगा।
इस मौक़े पर श्रवण कुमार कश्यप, कन्हैयालाल चौहान, राकेश कश्यप, सुरजन सिंह यादव, राजेंद्र यादव, जसकरण कश्यप, सुभाष कश्यप, देशराज यादव, राजमल रावत, सोनापति, लल्लू यादव सहित तमाम भक्तगण मौजूद रहे।
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