कथावाचक उमेश महराज ने गोवर्धन पूजा की कथा सुनाकर श्रोताओ को भाव से किया विभोर
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी
मसौली बाराबंकी। विकास खण्ड मसौली की ग्राम पंचायत बड़ागांव के मोहल्ला नाली पार स्थित दुर्गा मंदिर पर चल रही 7 दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के 6 वे दिन कथावाचक उमेश महराज ने गोवर्धन पूजा की कथा सुनाकर श्रोताओ को भाव विभोर कर दिया।
गोवर्धन पूजा की कथा श्रद्धालुओं को सुनाई उन्होंने कहा कि भगवान की लीलाएं मानव जीवन के लिए प्रेरणा दायक है एक दिन श्री कृष्ण ने देखा कि सभी ब्रजवासी तरह-तरह के पकवान बना रहे हैं, पूजा का मंडप सजाया जा रहा है और सभी लोग प्रातः काल से ही पूजन की सामाग्री एकत्रित करने में व्यस्त हैं। तब श्री कृष्ण ने योशदा जी से पूछा, मईया आज सभी लोग किसके पूजन की तैयारी कर रहे हैं। इस पर मईया यशोदा ने कहा कि पुत्र सभी ब्रजवासी इंद्र देव के पूजन की तैयारी कर रहे हैं।
तब कन्हा ने कहा कि सभी लोग इंद्रदेव की पूजा क्यों कर रहे हैं। इस पर माता यशोदा उन्हें बताते हुए कहती हैं, इंद्रदेव वर्षा करते हैं, जिससे अन्न की पैदावार अच्छी होती है और हमारी गायों को चारा प्राप्त होता है। इसपर कान्हा ने कहा कि वर्षा करना तो इंद्रदेव का कर्तव्य है। यदि पूजा करनी है तो हमें गोवर्धन पर्वत की करनी चाहिए, क्योंकि हमारी गायें तो वहीं चरती हैं और हमें फल-फूल, सब्जियां आदि भी गोवर्धन पर्वत से प्राप्त होती हैं।
इसके बाद सभी ब्रजवासी इंद्रदेव की बजाए गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। इस बात को देवराज इंद्र ने अपना अपमान समझा और क्रोध में आकर प्रलयदायक मूसलाधार बारिश शुरू कर दी, जिससे चारों ओर त्राहि-त्राहि होने लगी। सभी अपने परिवार और पशुओं को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। तब ब्रजवासी कहने लगे कि ये सब कृष्णा की बात मानने का कारण हुआ है, अब हमें इंद्रदेव का कोप सहना पड़ेगा।
इसके बाद भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव का अहंकार दूर करने और सभी ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया। तब सभी ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली। इसके बाद इंद्रदेव को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने श्री कृष्ण से क्षमा याचना की। इसी के बाद से गोवर्धन पर्वत के पूजन की परंपरा आरंभ हुई।इस मौक़े पर श्रवण कुमार कश्यप, कन्हैयालाल चौहान, राकेश कश्यप, सुरजन सिंह यादव, राजेंद्र यादव, जसकरण कश्यप, सुभाष कश्यप, देशराज यादव, राजमल रावत, सोनापति, लल्लू यादव सहित तमाम भक्तगण मौजूद रहे।
.

