कथावाचक पंडित मनीष तिवारी जी महाराज ‘मयंक’ ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया।
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी
मसौली बाराबंकी। व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। विकास खण्ड सिरौलीगौसपुर के ग्राम खानपुर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा मे कथावाचक पंडित मनीष तिवारी जी महाराज ‘मयंक’ ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। श्रीकृष्ण की जन्म कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
कथा वाचक मनीष तिवारी जी महाराज ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा वाचक ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा। इसके साथ ही श्री कृष्ण का रुकमणी का विवाह तथा 16 हजार 107 विवाह का प्रसंग सुनाया गया। इस मौक़े पर आयोजक रमापति वर्मा, नौमीलाल वर्मा, अनिल कुमार, संजय कुमार सहित समस्त ग्रामीण उपस्थित रहे ।

