चुनाव के साल में जंग के लिए मचल रही है अमरीकी सरकार! अपनी तेल इंडस्ट्री बचाने के लिए क्या पूरी इकानोमी को दावं पर लगाना चाहते हैं ट्रम्प?

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

मिस्र के समाचार पत्र  अलअरबी 21  की वेबसाइट पर फ्रास अबू हेलाल ने अपने एक लेख में ईरान के खिलाफ अमरीकी युद्ध की संभावनाओं का जायज़ा लिया है और उसके कई आयामों पर प्रकाश डाला है। हालांकि यह एक सच्चाई है कि ईरान के खिलाफ सीमित युद्ध की  शक्ति किसी में नहीं है और ईरान , क्षेत्र के इराक जैसे अन्य देशों से बहुत अलग है।पूरी दुनिया में पहली बार तेल का मूल्य शून्य से भी नीचे चला गया है और ज़ाहिर सी बात है तेल के मूल्य में इस गिरावट के बाद पूरी दुनिया नये आर्थिक संकट के मुहाने पर है।मौजूदा हालात में तेल के मूल्यों में भारी गिरावट और कोरोना से उपजे संकट की वजह से पश्चिम और अरब जगत के बहुत से टीकाकारों का कहना है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट के समाधान के लिए एक भयानक युद्ध की ज़रूरत है ताकि आर्थिक समीकरण बदल जाएं और विश्व व्यवस्था में पूरी तरह से बदलाव आ जाए।
लेकिन सवाल यह है कि क्या दुनिया इस तरह के किसी युद्ध को सहन कर पाएगी? क्योकि इतने बड़े युद्ध का बहुत बड़ा आर्थिक और जानी नुक़सान होगा क्योंकि बड़ा युद्ध विश्व की बड़ी शक्तियों के बीच होगा और उन सब के पास बड़े बड़े और विनाशक हथियार हैं और फिर अगर अमरीका और चीन के बीच युद्ध होता है तो वह विश्व युद्ध में भी बदल सकता है। वैसे भी अमरीकी राष्ट्रपति किसी लंबी लड़ाई में व्यस्त नहीं होना चाहेंगे। इसके अलावा चीन और पश्चिमी देशों के बीच बहुत बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन है जो युद्ध की दशा में खत्म हो जाएगा इससे दोनों पक्षों को भारी नुकसान होगा। इस लिए यह कहा जा रहा है कि इन कारणों की वजह से चीन के साथ अमरीका के युद्ध की संभावना बहुत कम है तो फिर अमरीका तेल के संकट से बचने के लिए किस से युद्ध कर सकता है।
कुछ टीकाकारों का मानना है कि चीन के खिलाफ युद्ध के भयानक परिणामों की वजह से अमरीका ईरान के साथ सुनियोजित और नियंत्रण युद्ध का रास्ता अपना सकता है क्योंकि चीन से युद्ध की तुलना में ईरान के साथ युद्ध का नुक़सान काफी कम होगा।
इसी संदर्भ में न्यूयार्क टाइम्ज़ ने गत 27 मार्च को अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि पेंटागन ईरान से संबंधित इराक़ी सशस्त्र संगठनों पर कोरोना के बावजूद हमला करने का इरादा रखता है। हालांकि पेंटागन के बड़े अधिकारियों द्वारा इस प्रकार के किसी कदम के भयानक परिणामों की ओर से चेतावनी के बाद अमरीकी सरकार ने इराक़ में सशस्त्र गुटों को निशाना बनाने का अपना इरादा बदल दिया लेकिन इससे यह साबित हो गया कि अगर ईरान से तनाव बढ़ा और अमरीकी सरकार को यह लगा कि उसके हितों की रक्षा हो सकती है तो वह ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ सकता है।

वाशिंगटन ने कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान की शिकायत करेगा। हालांकि ट्रम्प प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस आधार पर ईरान की इस वैज्ञानिक उपलब्धि की शिकायत करेगा।वास्तव में ईरान की इस वैज्ञानिक एवं सामरिक उपलब्धि ने तेहरान के दुश्मनों के होश उड़ा दिए हैं, इसलिए कि अब ईरान न ज़मीन पर अपनेदुश्मनों की हर गतिविधि पर अंतरिक्ष से पैनी नज़र रख सकता है।
ख़ास तौर से ईरान के पहले सैन्य उपग्रह ने तस्वीरें भी बेजनी शुरू कर दी हैं, जिसमें साफ़ तौर से देखा जा सकता है कि यह उपग्रह दिन में तीन बार अमरीका के ऊपर से होकर गुज़र रहा है।इस्राईली मीडिया ने तो ईरान के पहले सैन्य उपग्रह की सफलता को अंतरिक युद्ध की शुरूआत क़रार दे दिया है।बुधवार को उपग्रह के सफल लॉन्च के बाद इस्राईली विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके दावा किया था कि उपग्रह के लॉन्च बाद अब ईरान, आधुनिक मिसाइल तकनीक को विकसित कर के अंतर महाद्वीपीय मिसाइल बना लेगा।

 

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