सऊदी अरब को कहां लेकर जा रहे हैं बिन सलमान? कभी क़र्ज़ न लेने वाला देश अब क़र्ज़ में डूबता जा रहा है!
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की नीतियों, तेल की क़ीमत में भारी गिरावट और कोरोना महामारी से पैदा होने वाले हालात के नतीजे में सऊदी अरब का भविष्य क्या होगा इसका जायज़ा ब्रितानी पत्रकार डेविड हर्स्ट ने लिया है।
हर्स्ट ने मिडिल ईस्ट आई में अपने लेख में लिखा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन से मुहम्मद बिन सलमान ने जो आक्रामक टेलीफ़ोनी वार्ता की और जिसके बाद तेल की जंग शुरू हो गई उससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि सऊदी अरब किस शैली पर चल रहा है।
बिन सलमान को यक़ीनन अब पता चल चुका है कि उन्होंने कितनी बड़ी हिमाक़त कर दी। तेल की क़ीमतें गिर गईं और तेल के भंडार भर गए जिसके नतीजे में कंपनियां अब कुओं को बंद करने पर मजबूर हैं। सऊदी अरब के बारे में कोई नही सोचता था कि यह देश क़र्ज़े लेने पर मजबूर होगा मगर आज वह मजबूर है। बिन सलमान को यह भी पता चल गया है कि वह स्थिति क्या होगी जब दुनिया को सऊदी अरब के तेल की ज़रूरत नहीं रहेगी। सऊदी अरब की अर्थ व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों से लगातार गिरावट का शिकार हैं जब 2015 में मुहम्मद बिन सलमान ने सत्ता अपने हाथ में ली थी तो उस समय सऊदी अरब के पास 732 अरब डालर का विदेशी मुद्रा भंडार था। मगर पिछले साल दिसम्बर में यह भंडार कम होकर 499 अरब डालर रह गया था। यानी चार साल में 233 अरब डालर हाथ से निकल गए। आईएमएफ़ का कहना है कि सऊदी अरब का क़र्ज़ा जीडीपी का 19 प्रतिशत हो गया है और कोरोना के नतीजे में पैदा होने वाला संकट जारी रहा तो आने वाले साल में क़र्ज़ा जीडीपी का 27 प्रतिशत हो जाएगा और 2022 में यह क़र्जा जीडीपी का 50 प्रतिशत हो जाएगा।
कोरोना के चलते जारी लाक डाउन की वजह से सऊदी अरब ने हज और उमरह भी बंद कर दिया है। इससे सऊदी अरब को हर साल कम से कम 8 अरब डालर की इनकम हो जाती थी।अब तक तो यह स्थिति थी कि सऊदी अरब अगर कहीं एक अरब डालर ख़र्च करना चाहता था तो पलक झपकते ही कर लेता था मगर अब यह हालात नहीं हैं। अब बिन सलमान को बहुत फूंक फूंक कर क़दम उठाना पड़ेगा।
सऊदी अरब के आर्थिक संकट का काफ़ी असर दूसरे देशों पर भी पड़ेगा क्योंकि सऊदी अरब में काम करने वाले बहुत से देशों के लोग अपने यहां बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भेजा करते थे जो अब नहीं भेज पाएंगे। मिस्र जैसे देशों को इसका काफ़ी नुक़सान होगा।
स्रोतः अलजज़ीरा+ मिडिल ईस्ट आई

