ईरान की जवाबी धमकी के बाद, अमरीका बहादुर ढेर, ईरान के साथ युद्ध को लेकर ट्रम्प को पेंटागन की दो टूक

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

ईरान की इस्लामी क्रांति फ़ोर्स आईआरजीसी की इस जवाबी धमकी के बाद कि अगर अमरीकी युद्धपोतों ने फ़ार्स खाड़ी में गश्त करने वाली स्पीड बोट्स या किसी जहाज़ को ख़तरे में डालने की मूर्खता की तो अमरीकी युद्धपोतों को फ़ार्स खाड़ी की गहराईयों में डुबो दिया जाएगा, पेंटागन ने क़दम पीछे खींच लिए हैं।ग़ौरतलब है कि पिछले मंगलरवार को फ़ार्स खाड़ी में अमरीकी युद्धपोतों और गश्त करने वाली ईरान की सैन्य स्पीड बोट्स का आमना सामना होने के बाद, अमरीकी राष्ट्रपति डोलन्ड ट्रम्प ने ट्वीट करके ईरानी स्पीड बोट्स को उड़ाने की धमकी दी थी।

उसके एक दिन बाद बुधवार को व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान ट्रम्प ने अपनी धमकी दोहराते हुए कहा था कि अगर ईरानी सैन्य बोट्स दोबारा अमरीकी युद्धपोतों के लिए ख़तरा उत्पन्न करती हैं तो हम खड़े होकर तमाशा नहीं देखेंगे। वे हमारे युद्ध पोतों और हमारे महान चालकों तथा नाविकों को ख़तरे में डाल रहे हैं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगा। हम और हमारे लोग उन्हें शूट कर देंगे और पानी से निकाल बाहर फेकेंगे।
ट्रम्प की इस धमकी के बाद, आईआरजीसी के प्रमुख मेजर जनरल हुसैन सलामी ने कहा था कि हमने स्पष्ट शब्दों में उन्हें समझा दिया है कि हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से गंभीर हैं और किसी भी तरह की ग़लत हरतक का मुंह तोड़ जवाब देंगे।
तेहरान की इस जवाबी धमकी के बाद, पेंटागन के सूत्रों का कहना है कि अमरीकी जनरलों और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच, फ़ार्स खाड़ी में अमरीकी सैन्य गतिविधियों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

पेंटागन ने ट्रम्प से दो टूक कह दिया है कि वर्तमान परिस्थितियों में अमरीका, ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है और तेहरान के साथ किसी भी तरह का सीधा टकराव वाशिंगटन के लिए घातक होगा।ग़ौरतलब है कि अमरीका, कोरोना संकट से बुरी तरह जूझ रहा है, यहां तक कि अमरीकी अर्थव्यवस्था पर क़हर बरपा करने साथ ही अमरीकी सेना को भी इस महामारी ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प चुनावी वर्ष में अपनी तमाम नाकामियों पर पर्दा डालने और अपनी लोकप्रियता में रिकॉर्ड गिरावट से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए पश्चिम एशिया में एक नया युद्ध छेड़ने की योजना बना रहे हैं।हालांकि इससे पहले अमरीका ने अपरोक्ष या परोक्ष रूप से इस क्षेत्र में जितने भी युद्ध शुरू किए उनमें उसे मुंह की खानी पड़ी और खरबों डॉलर गंवाने के साथ ही भारी जानी नुक़सान भी झेलना पड़ा। इसके अलावा, अमरीकी लड़ाईयों ने विश्व भर में अभूतपूर्व रूप से आतंकवाद को भी बढ़ावा दिया।हालांकि वाशिंगटन क्षेत्र में अपनी पराजयों का ठीकरा तेहरान के सिर फोड़ता रहा है, लेकिन सच यह है कि अमरीकी अधिकारी पश्चिम एशिया की जनता और उसकी प्राथमिकताओं को समझ पाने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं। अब अगर अमरीका कोई नया युद्ध छेड़ता है तो यह उसके ताबूत में आख़िरी कील साबित होगा और वह दिन दूर नहीं रहेगा कि अपने विरोधियों को छोटे छोटे टुकड़ों में बांटने की साज़िशें करने वाला अमरीकी साम्राज्य ख़ुद ही छोटे छोटे टुकड़ों में बंट जाएगा, जिन्हें समेटना दुश्वार नहीं असंभव होगा।

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