कथा सातवे दिन श्री कृष्ण जन्म उत्सव की कथा सुनाई गई। भक्तजन कृष्ण के जन्म को सुनकर हरे कृष्णा के स्वरों के साथ झूम उठे।

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता एसएम न्युज24 टाइम्स बाराबंकी

बाराबंकी। ग्राम मसौली के मोहल्ला भूलीगंज स्थित माँ शक्तिकाली पीठ मंदिर पर चल रही श्रीमद भगवतकथा कथा सातवे दिन श्री कृष्ण जन्म उत्सव की कथा सुनाई गई। भक्तजन कृष्ण के जन्म को सुनकर हरे कृष्णा के स्वरों के साथ झूम उठे।

कथा वाचिका साध्वी पूनम कहा कि द्वापर युग में जब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया, ठीक उनके पहले मां दुर्गा ने योग माया के रूप में जन्म लिया था। मां दुर्गा का यह दिव्य अवतार कुछ समय के लिए था।गर्गपुराण के अनुसार भगवान कृष्ण की मां देवकी के सातवें गर्भ को योगमाया ने ही बदलकर कर रोहिणी के गर्भ में पहुंचाया था, जिससे बलराम का जन्म हुआ। योगमाया ने यशोदा के गर्भ से जन्म लिया था। इनके जन्म के समय यशोदा गहरी नींद में थीं और उन्होंने बालिका को देखा नहीं था। तथा कंस के कारागार में देवकी के आठवें पुत्र के जन्म लेने के बाद वसुदेव उस बालक को नंद के यहां यशोदा के पास लिटा दिया, जिससे बाद में आंख खुलने पर यशोदा ने बालिका के स्थान पर पुत्र को पाया। वासुदेव यशोदा के यहां जन्मी बालिका( योगमाया) को मथुरा वापस आ गये और जब कंस ने उस बालिका को मारना चाहा तो वह हाथ से छूट कर आकाशवाणी करती हुई चली गईं। देवी योगमाया के बारे में कहा जाता है कि वे भगवान श्रीकृष्ण की बहन थी, जो उनसे बड़ी थीं।
कथा वाचिका साध्वी पूनम ने छप्पन भोग की कथा सुनाते हुए कहा कि एक बार कृष्ण के प्रेम में डूबी गोपिकाओं ने मास पर्यन्त यमुना में ब्रम्ह मुहूर्त में स्नान किया. इस स्नान के पीछे जो वजह थी वह यह कि सभी गोपियां श्री कृष्ण को अपने वर के रूप में देखना चाहती हैं. इस स्नान के बाद सभी गोपियों ने मां कात्यायनी से वर चाहा कि उन्हें श्री कृष्ण ही पति के रूप में मिलें. अपने इस वर के बदले उन्होंने मां कात्यायनी को उद्दापन में छप्पन तरह के आहार देने की मन्नत मांगी थी. बस इसी के बाद से छप्पन भोग आस्तित्व में आया ।
इस मौक़े पर कथा आयोजक अमरीश वर्मा, गुड्डू यादव, राजू यादव, अंबर यादव, राम अंचल विश्वकर्मा, गुड्डू मौर्य , मंशाराम दीक्षित सहित सैकड़ो भक्तगण मौजूद रहे।

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता एसएम न्युज24 टाइम्स बाराबंकी

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